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बलिया, 17 मई । उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गड़हांचल की लाइफ लाइन कही जाने वाली मंगई नदी से जुड़े नालों का अवरोध खत्म करने की पहल हुई है। जिससे हजारों एकड़ खेती योग्य भूमि के हर साल जलमग्न रहने की संभावना नगण्य हो गई है।

मंगई नदी से जुड़े नालों में जमी गाद की खुदाई व कई जगहों पर पुलिया के निर्माण के लिए विगत दिनों पूर्व मन्त्री नारद राय ने जलशक्ति मन्त्री स्वतन्त्रदेव सिंह से लखनऊ में मुलाक़ात की थी। उन्होंने जलशक्ति मंत्री से किसानों की इस विकराल समस्या के निराकरण का अनुरोध किया था। जिसके बाद जलशक्ति मन्त्री ने टेलीफोन से अधिशासी अभियन्ता सिंचाई को त्वरित समाधान के निर्देश दिए थे। जिसके बाद बलिया आने के बाद पूर्व मन्त्री नारद राय सिंचाई विभाग के कार्यालय पहुँच कर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता राकेश कुमार से दर्जनों गांवों के किसानों के हजारों एकड़ खेत से जुड़े नाले जो मंगई नदी में गिरते हैं, को मौके पर चलकर देखने को कहा था। अधिशाषी अभियंता अपने साथ सहायक अभियन्ता राम मिलन गोंड़ व अवर अभियन्ता राजकुमार चौरसिया सहित सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की टीम के साथ निरीक्षण करने पहुंचे थे। अधिकारियों ने नरहीं से मंगई नदी तक जाने वाली लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबी करौंटी ड्रेन, शहाबुद्दीन पुर (कारों) से शुरू होने वाले ढाई किलोमीटर के फिरोजपुर ड्रेन, टुटुआरी-बघौना से मंगई नदी तक जाने वाले साढ़े सात किलोमीटर के नरहीं ड्रेन, टाड़ा ब्रम्हबाबा के स्थान को जाने वाली ड्रेन की सफाई व कुछ विशेष जगहों पर पुलिया के निर्माण को लेकर निरीक्षण किया।

अधिशासी अभियन्ता ने बताया कि जलशक्ति मन्त्री द्वारा टेलीफोन पर दिए गए निर्देश पर ड्रेनों की सफाई के लिए टेण्डर कर दिया गया है, बरसात के पूर्व ड्रेन सफाई का कार्य पूर्ण करा दिया जाएगा। करइल क्षेत्र के लोगों की इस विकराल समस्या के समाधान कराए जाने पर नारद राय ने जलशक्ति मन्त्री का आभार व्यक्त किया। नारद राय ने रविवार को बताया कि करईल क्षेत्र के हजारों किसान अपने खेतों के साल भर जलमग्न रहने से परेशान थे। उनकी यह समस्या दूर हो जाएगी। प्रदेश की योगी सरकार किसानों के हित में कार्य करने के लिए प्रत्यत्नशील है।

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