मुजफ्फरनगर। गरीब व भोले-भाले लोगों के बैंक खाते व सिम कार्ड खुलवाकर उन्हें साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल करने वाले अंतरजाल अपराधी को पुलिस ने दबोच लिया। यह युवक पहले सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उम्र निकल जाने के बाद उसने साइबर ठगी की राह पकड़ ली। महज़ डेढ़ साल में ही यह शातिर पाँच करोड़ अड़तीस लाख की ठगी कर चुका है।
थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम ने आरोपी अंकित तोमर पुत्र ओमपाल सिंह निवासी ग्राम बामनौली थाना दोघट, बागपत को शामली बाईपास पर शाहपुर कट से आगे पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार किया। पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ ने पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता कर बताया कि गिरफ्तार अंकित तोमर साइबर नेटवर्क का हिस्सा है, जो केल्विन नाम के एक शख्स से जुड़ा था। केल्विन अभी किसी दूसरे देश से इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था। अब तक की जांच में उसका आईपी एड्रेस भी विदेश का पाया गया है। अंकित और केल्विन की बातचीत केवल ऑनलाइन माध्यम से होती थी। पुलिस दोनों के पिछले और मौजूदा रिकॉर्ड खंगाल रही है।
पूछताछ में अंकित ने खुलासा किया कि उसे फेसबुक पर पैसे कमाने का लिंक मिला था। वहां से टेलीग्राम चैनल जुड़ने पर उसकी बातचीत केल्विन से हुई, जिसने ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी लेन-देन के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने पर मोटा कमीशन देने का लालच दिया। इसके बाद अंकित भोले-भाले लोगों के खाते खुलवाकर उनकी पूरी किट और सिम कार्ड लेकर तमिलनाडु, चेन्नई और गुजरात जैसे राज्यों में भेजता था।अंकित को प्रत्येक बचत खाते पर करीब 15 हज़ार, चालू खाते पर 25 से 30 हज़ार रुपये तक मिलते थे। इस रकम का आधा हिस्सा वह खाता खुलवाने वाले व्यक्ति को दे देता था और आधा खुद रख लेता था। वहीं जीएसटी खातों में जितनी भी ट्रांजैक्शन होती थी, उसका 10 प्रतिशत कमीशन सीधा अंकित की जेब में जाता था।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों के अनुसार, अंकित द्वारा खुलवाए गए खातों पर करीब 79 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें लगभग 5 करोड़ 38 लाख रुपये की ठगी की जा चुकी है।अंकित इतना शातिर था कि जिन खातों में फर्जी लेन-देन पकड़ा जाता था, उन्हें दोबारा सक्रिय करवाने के लिए वह फर्जी इनवॉइस बिल बनवाता और बैंक अधिकारियों को यह साबित करता कि खाते असली कारोबार से जुड़े हैं। इस कार्यवाही में अंकित के पास से 26 सिम कार्ड, 32 एटीएम कार्ड, पांच मोबाइल फोन, एक पासबुक, दो चैक, एक डायरी जिसमें इसका हिसाब किताब होता है लेनदेन का, फर्जी बिल, स्टांप मोहर, वाई फ़ाई, एक गाड़ी ग्रैंड I -10, 2540 रुपए नगर बरामद हुए है |
इस बड़ी कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह, निरीक्षक प्रदीप कुमार, उपनिरीक्षक गौरव चौहान, उपनिरीक्षक जय शर्मा, हेड कांस्टेबल आकाश चौधरी और कांस्टेबल राहुल कुमार की अहम भूमिका रही।
