मुज़फ्फरनगर।
जनपद में फैक्ट्रियों में आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के इस्तेमाल और दूसरे राज्यों से लाए जा रहे गीले कूड़े को जलाने से फैल रहे प्रदूषण को लेकर विवाद अब खुली टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। किसानों और उद्यमियों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन पहली बार मध्यस्थ की भूमिका में सामने आया और दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर वार्ता कराई, लेकिन बैठक के दौरान माहौल कई बार गरमा गया।

कचहरी स्थित जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उस समय सनसनी फैल गई, जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि आरडीएफ के नाम पर गीला कूड़ा जलाने नहीं दिया जाएगा। इस पर पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बिंदल पेपर मिल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल भड़क उठे और साफ कहा कि दबाव की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जरूरत पड़ी तो सभी उद्योग बंद कर उनकी चाबियां जिलाधिकारी को सौंप दी जाएंगी।

एडीएम प्रशासन संजय सिंह के नेतृत्व में हुई इस बैठक में आरडीएफ की परिभाषा, उसकी वैधानिक स्थिति, फैक्ट्रियों में उपयोग और उससे होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि आरडीएफ की आड़ में दूसरे राज्यों से गीला कूड़ा लाकर जलाया जा रहा है, जिससे गांवों, खेतों और आबादी वाले इलाकों में प्रदूषण फैल रहा है और ग्रामीणों का स्वास्थ्य खतरे में है। वहीं उद्यमियों की ओर से कहा गया कि फैक्ट्रियों में केवल अनुमति प्राप्त आरडीएफ ईंधन का ही उपयोग हो रहा है और सभी संयंत्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व शासन की गाइडलाइन के अनुसार संचालित हैं। ऑनलाइन मॉनीटरिंग का भी दावा किया गया।बैठक के दौरान कुछ ऐसे मुद्दे भी सामने आए, जिनके समाधान के लिए शासन स्तर पर निर्णय आवश्यक बताया गया। दोनों पक्षों की सहमति से इन बिंदुओं पर प्रस्ताव शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले जट मुजहेड़ा में आरडीएफ के विरोध में किसान पंचायत हुई थी, जहां प्रशासन ने वार्ता का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में हुई इस बैठक को अहम माना जा रहा है। इस बीच जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने आरडीएफ के उपयोग और प्रदूषण की निगरानी के लिए पहले ही उच्च स्तरीय समिति गठित कर फैक्ट्रियों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण से कोई समझौता नहीं होगा और किसानों, ग्रामीणों व उद्योगों के हितों में संतुलन बनाते हुए फैसला लिया जाएगा, लेकिन बैठक में दिखे तीखे तेवरों से साफ है कि आरडीएफ का मुद्दा अभी और गरमाने वाला है।

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