आम आदमी पार्टी (AAP) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक मित्तल के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी छापेमारी की है। यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ ही दिन पहले मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर नियुक्त किया गया था। उन्होंने राघव चड्ढा की जगह ली थी, जिनके बारे में खबरें थीं कि उनके अरविंद केजरीवाल के साथ मतभेद चल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED की टीमों ने 8 से 9 जगहों पर तलाशी ली, जिनमें गुरुग्राम और पंजाब के कुछ ठिकाने भी शामिल हैं। सांसद के आवास, उनके बेटे की संपत्तियों और एक फार्महाउस पर छापेमारी की गई।

 

मित्तल जालंधर में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक हैं। अधिकारियों को फंड से जुड़ी गड़बड़ियों का शक है। जांच के सिलसिले में ED की टीमें जालंधर स्थित यूनिवर्सिटी परिसर भी पहुंचीं। तलाशी अभी भी जारी है, क्योंकि एजेंसियां ​​इस मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

 

राघव चड्ढा बनाम अशोक मित्तल: कूटनीतिक संयोग या कुछ और?

राजनीतिक गलियारों में इस छापेमारी को हालिया बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। राघव चड्ढा, जो लंबे समय तक राज्यसभा में पार्टी का चेहरा रहे थे, उन्हें हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई थी। इस नियुक्ति के महज कुछ दिनों बाद ही ED की यह कार्रवाई AAP के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।

AAP का रुख और राजनीतिक गर्माहट

आम आदमी पार्टी ने अक्सर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को’ राजनीति से प्रेरित’ बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब भी कोई नेता सक्रिय होता है या उसे बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है, केंद्र सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल कर उसे रोकने की कोशिश करती है। हालांकि, इस मामले में अभी तक अशोक मित्तल या यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

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