राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गयी है जबकि आप सदस्यों की संख्या घटकर तीन हो गयी है। वहीं अब राज्यसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की कुल संख्या 141 से बढ़कर 148 तक पहुंच गई है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा उच्च सदन में दलों की स्थिति को अपडेट किए जाने के साथ ही यह परिवर्तन आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया है।

हम आपको बता दें कि यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब कुछ दिन पहले राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने और छह अन्य सांसदों ने आम आदमी पार्टी से अलग होने और भारतीय जनता पार्टी में विलय का निर्णय लिया। उनके साथ स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को सातों सांसदों ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर उन्हें विलय के बाद भाजपा सांसद माने जाने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को राज्यसभा के सभापति को एक पत्र लिखकर दल बदल करने वाले सातों सांसदों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया था। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने सभापति राधाकृष्णन को पत्र देकर उच्च सदन में पार्टी के उन सातों सांसदों को अयोग्य ठहराने का अनुरोध किया है, जिन्होंने हाल ही में आप छोड़कर भाजपा में विलय की घोषणा की थी।

हम आपको याद दिला दें कि पिछले सप्ताह राघव चड्ढा ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया था कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सदस्यों ने संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भारतीय जनता पार्टी में विलय का फैसला किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष के अंत तक राज्यसभा की 30 से अधिक सीटें खाली होने वाली हैं, जिससे भारतीय जनता पार्टी को कम से कम पांच अतिरिक्त सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे पार्टी दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकती है, जो कि 163 का आंकड़ा है।

दूसरी ओर, राघव चड्ढा ने अपने फैसले को लेकर उठ रही आलोचनाओं का जवाब भी दिया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लोगों के संदेश मिल रहे हैं, जिनमें कुछ लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं तो कुछ उनके निर्णय के कारण जानना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के 15 महत्वपूर्ण वर्ष आम आदमी पार्टी को समर्पित किए और वह इसके संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। उनका कहना था कि वह राजनीति में कॅरियर बनाने नहीं आए थे, बल्कि एक विचारधारा के साथ जुड़े थे।

हालांकि, उन्होंने पार्टी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, पार्टी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का कार्य वातावरण विषाक्त हो गया है, जहां काम करने और संसद में बोलने तक पर रोक लगाई जाती है। राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें लगने लगा था कि वह सही व्यक्ति हैं लेकिन गलत पार्टी में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने कई विकल्पों पर विचार किया, जिनमें राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर सुधार लाने की कोशिश करना या किसी अन्य मंच से जुड़ना शामिल था। अंततः उन्होंने नया राजनीतिक रास्ता चुनने का निर्णय लिया।

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि यह फैसला किसी दबाव या डर के कारण नहीं लिया गया, बल्कि निराशा और असंतोष के चलते लिया गया है। उनका कहना था कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग एक साथ गलत नहीं हो सकते।

 

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