उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में भड़की हिंसा के सिलसिले में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति ने शनिवार को और लोगों के बयान दर्ज किए। जिले में एक मुगलकालीन मस्जिद का न्यायालय द्वारा निर्देशित सर्वेक्षण होने के दौरान भड़की हिंसा में कई लोगों की मौत हुई थी।

इस मामले में हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा यहां पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में न्यायिक आयोग के समक्ष पेश हुए। उन्होंने बाद में संवाददाताओं को बताया कि आयोग ने उनसे घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शी के तौर पर लिखित हलफनामा मांगा था।

हिंदू पक्ष के वकील गोपाल शर्मा ने कहा, ‘‘मैंने आयोग के समक्ष इस हलफनामे को प्रस्तुत किया है।आयोग ने मुझसे कई प्रश्न पूछे, मैंने उनका उत्तर दिया। उन्होंने पूछा कि कौन-कौन मौजूद थे, दंगा सुनियोजित था या नहीं, क्या कोई पूर्व योजना थी, लोग जबरन क्यों घुसे, फोटोग्राफी कैसे की गई, मैंने इन सभी के उचित उत्तर दिए।’’

पिछले साल 19 नवंबर से ही संभल में तनाव का माहौल है जब शाही जामा मस्जिद का न्यायालय द्वारा आदेशित सर्वेक्षण इस दावे के बाद किया गया कि इस स्थल पर पहले हरिहर मंदिर था।

सर्वेक्षण के दूसरे दौर के दौरान 24 नवंबर को, प्रदर्शन कर रहे स्थानीय लोगों की सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प हो गई, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए।

न्यायिक आयोग के सदस्य पूर्व पुलिस महानिदेशक (पूर्व डीजीपी) अरविंद कुमार जैन ने पत्रकारों को बताया कि शनिवार को करीब 16 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं , जबकि शुक्रवार को 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे।

न्यायिक जांच आयोग में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र अरोड़ा, पूर्व पुलिस प्रमुख अरविंद कुमार जैन और उत्तर प्रदेश के पूर्व अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद शामिल हैं।

आयोग के सदस्यों ने एक दिसंबर, 2024 के अलावा 21 और 30 जनवरी, 2025 को संभल का दौरा किया था। उन्होंने अपनी पिछली यात्रा के दौरान भी अधिकारियों के बयान दर्ज किए थे।

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