लड़की के साथ दोस्ती को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को रेगुलर बेल देने से साफ इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि वैलेंटाइन डे पर लड़की से दोस्ती हो गई तो इसका मतलब यह नहीं कि उससे संबंध बनाने का लाइसेंस मिल गया। बहाने से घर बुलाकर उसके साथ संबंध बनाना भी अपराध है।
आरोपी के मर्जी से संबंध बनाने के आरोप
बता दें कि जस्टिस गिरीश कथपालिया की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। आरोपी की तरफ से वकील नेभी दलीलें दी। आरोपी वकील ने कहा कि पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा है। उसने लड़के के साथ मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए तो इसके लिए अकेले लड़के को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? वैलेंटाइन डे पर दोस्ती रोमांटिक पहलू होने का संकेत है। जस्टिस ने आरोपी के वकील की इस दलील को निराधार करार दिया और कहा कि इसका मतलब यह नहीं संबंध बना लो।
सहमति के बिना संबंध-मांग भरना गलत
जस्टिस गिरीश ने कहा कि लड़की नाबालिग है और उसकी सहमति के बिना संबंध बनाए गए। उसकी सहमति के बिना उसकी मांग में सिंदूर भरने को सही नहीं ठहराया जा सकता। बेशक कानून में लड़की की मांग भरने को कोई अपराध न माना गया हो, लेकिन लड़की किसी लड़के की दोस्त है और वैलेंटाइन डे के दिन दोस्ती हुई थी तो इसका मतलब यह नहीं कि लड़के को मांग भरने का अधिकार मिल गया और जबरदस्ती की शादी को आधार बनाकर संबंध बनाने का लाइसेंस मिल गया।
पुलिस को दी शिकायत में लड़की ने बताया कि उसकी उम्र 17 साल है और वह आरोपी को एक साल से जानती है। दोनों दोस्त थे और 14 फरवरी 2025को आरोपी ने उसे बहाने से घर बुलाया था। जब वह उसके घर पहुंची तो वह ज्यादा रोमांटिक होने का प्रयास कर रहा था। विरोध किया तो उसने जबरन उसकी मांग में सिंदूर भर दिया। इसके बाद उसने शादी होने का दावा करते हुए हक जताया और जबरदस्ती संबंध बनाए। घर आकर उसने अपने भाई के बताया और पुलिस को शिकायत दी।
