धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी कल गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले प्रतिष्ठित उदय प्रताप (UP) कॉलेज में दिनदहाड़े एक छात्र की हत्या ने पूरे शहर को सन्न कर दिया है। बीए चतुर्थ सेमेस्टर के होनहार छात्र सूर्य प्रताप सिंह उर्फ सूर्या को उसके ही साथी ने मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में भारी तनाव है और पुलिस छावनी में तब्दील कॉलेज से कई सुलगते सवाल सामने आ रहे हैं।

कैसे दी गई वारदात को अंजाम?
घटना कल सुबह करीब 11 बजे की है। यूपी कॉलेज के सामाजिक विज्ञान संकाय (Social Science Faculty) की गैलरी में छात्र मौजूद थे, तभी अचानक हमलावर ने सूर्य प्रताप पर ताबड़तोड़ 4 राउंड फायरिंग कर दी। हमलावर ने सीधे सूर्या के सिर और सीने पर गोली मारी ताकि उसके बचने की कोई गुंजाइश न रहे। वारदात के बाद आरोपी पहली मंजिल की ओर भागा और पीछे की दीवार फांदकर गायब हो गया। भागते समय उसने अपनी पिस्टल कूड़े के ढेर में फेंक दी थी, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।

इलाज के दौरान तोड़ा दम, भड़का छात्रों का गुस्सा
गंभीर रूप से घायल सूर्या को तुरंत बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। सूर्या की मौत की खबर मिलते ही कॉलेज के छात्र उग्र हो गए। छात्रों ने कॉलेज का मुख्य गेट बंद कर जमकर तोड़फोड़ की। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुरक्षा पर सवाल उठाए। हालात को काबू में करने के लिए खुद पुलिस कमिश्नर को भारी फोर्स के साथ मोर्चा संभालना पड़ा।

कौन था सूर्या सिंह? एक बुझ गया घर का चिराग
मृतक सूर्य प्रताप सिंह मूल रूप से गाजीपुर के सैदपुर (दुबैठा गांव) का रहने वाला था। सूर्या अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता ऋषिदेव सिंह और माता किरन सिंह एक विद्यालय में कर्मचारी हैं। वह अपने मिलनसार व्यवहार के कारण कॉलेज में काफी लोकप्रिय और होनहार छात्र माना जाता था। उसकी दो बहनें हैं, जिनके सिर से भाई का साया हमेशा के लिए उठ गया।

पुलिस की कार्रवाई और बड़े सवाल
पुलिस ने इस मामले में मंजीत चौहान और उसके साथी अनुज ठाकुर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला वर्चस्व की लड़ाई या पुरानी रंजिश का लग रहा है। आखिर एक छात्र हथियार लेकर कॉलेज परिसर के अंदर कैसे दाखिल हो गया? क्या गेट पर कोई चेकिंग नहीं थी? कॉलेज प्रशासन की इस बड़ी लापरवाही की कीमत एक होनहार छात्र को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

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