भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) चाहता है कि ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया विश्व चैंपियनशिप के ट्रॉयल में शामिल हो और अगर वह पटियाला में इस सप्ताह होने वाले ट्रॉयल से छूट चाहते हैं तो फिटनेस प्रमाणपत्र प्रदान करें।

बजरंग 25 और 26 अगस्त को विश्व चैंपियनशिप के ट्रॉयल में भाग नहीं लेने की योजना बना रहे हैं। वह 23 सितम्बर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी के लिए विदेश में अभ्यास करना चाहते हैं।

बजरंग के अलावा दीपक पूनिया (86 किग्रा) भी 16 सितम्बर से बेलग्रेड में विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने के इच्छुक नहीं हैं। दीपक भी एशियाई खेलों की तैयारी के लिए लंबे समय तक विदेश में अभ्यास करना चाहते हैं।

बजरंग ने किर्गिस्तान के इससिक (21 अगस्त-28 सितम्बर) में प्रशिक्षण का प्रस्ताव भेजा है तो वहीं दीपक एशियाई खेलों से पहले पांच सप्ताह (23 अगस्त से 28 सितम्बर) तक  खासाव्युर्ट (रूस) में प्रशिक्षण लेना चाहते हैं। साइ के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘हां, हमने बजरंग से पूछा है कि वह विश्व चैंपियनशिप के ट्रॉयल में भाग क्यों नहीं ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वह एशियाई खेलों के लिए तैयारी करना चाहते हैं और इसके लिए विदेश में प्रशिक्षण लेना चाहते हैं। हमने हालांकि उनसे 25 और 26 अगस्त को ट्रॉयल के लिए उपस्थित होने और 27 अगस्त को विदेश रवाना होने के लिए कहा है।’

विश्व चैंपियनशिप 2024 पेरिस ओलंपिक खेलों के लिए पहला क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट है और साइ इस बात से नाखुश है कि देश के दो शीर्ष पहलवान ट्रॉयल और इस अहम प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना चाहते हैं।

टोक्यो ओलंपिक में 65 किग्रा में कांस्य पदक जीतने वाले बजरंग ने अपने लिए फिजियोथेरेपिस्ट अनुज गुप्ता, निजी कोच सुजीत मान, ‘स्ट्रेंथ और कंडीश¨नग’ विशेषज्ञ काजी किरण मुस्तफा हसन और ‘स्पैरिंग पार्टनर’ जीतेंद्र किन्हा की सेवाएं मुहैया करने की मांग की है जबकि दीपक ने प्रशिक्षण के लिए कोच कमल मलिकोव और फिजियोथेरेपिस्ट शुभम गुप्ता की सेवाओं का अनुरोध किया है।

साइ चाहता है कि दोनों पहलवान पहले अपनी फिटनेस साबित करने के लिए विश्व चैंपियनशिप के ट्रॉयल में प्रतिस्पर्धा करें और उसके बाद हम विदेश में उनके प्रशिक्षण प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है। साइ के अधिकारी ने कहा, ‘हमने बजरंग से यह भी कहा है कि अगर वह ट्रॉयल्स को पूरी तरह से छोड़ना है तो अपना फिटनेस प्रमाणपत्र प्रदान करें।

हमें सहयोगी स्टाफ के लिए भी उनका अनुरोध प्राप्त हुआ है। मामला अभी एमओसी (मिशन ओलंपिक सेल) के पास है और वे इस पर फैसला लेंगे।’ बजरंग और उनके साथी किन्हा हाल ही में लंबे प्रशिक्षण के बाद किर्गिस्तान से लौटे है।

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