उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक अजीबोगरीब और रहस्यमयी घटना ने पूरे इलाके में आस्था और जिज्ञासा का माहौल बना दिया है। उघैती थाना क्षेत्र के शरह बरौलिया गांव में स्थित प्राचीन सिद्ध बाबा भोलेनाथ मंदिर के सामने खड़े एक नीम के पेड़ से शुक्रवार सुबह अचानक चिंगारियां निकलने लगीं। देखते ही देखते पेड़ अंदर से सुलगने लगा, जबकि बाहर से वह पूरी तरह हरा-भरा और सुरक्षित नजर आ रहा था।

यह घटना उस समय सामने आई जब मंदिर परिसर में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ चल रहा था। आग की जानकारी फैलते ही गांव समेत आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। बताया जा रहा है कि नीम के पेड़ में लगी आग करीब 18 घंटे तक लगातार जलती रही। सुबह लगभग 8 बजे शुरू हुई यह आग देर रात तक सुलगती रही। लोगों ने पानी और मिट्टी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन कोई खास असर नहीं पड़ा।

घटना के दौरान कई श्रद्धालुओं ने इसे दैवीय संकेत मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। लोगों ने पेड़ की परिक्रमा की, भजन-कीर्तन किया और महिलाएं-बच्चे भी श्रद्धा भाव से शामिल हो गए। कुछ लोगों का मानना है कि यह सिद्ध बाबा या भोलेनाथ की कृपा का चमत्कार है, जबकि दूसरी ओर कुछ स्थानीय लोग इसे किसी रासायनिक प्रतिक्रिया या प्राकृतिक कारण से जोड़कर देख रहे हैं और वैज्ञानिक जांच की मांग कर रहे हैं।

यह क्षेत्र पहले से ही अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर में मौजूद एक प्राचीन गुफा को लेकर वर्षों से लोककथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि यह गुफा हरिद्वार तक जाती है और सिद्ध बाबा इसी रास्ते से स्नान के लिए जाते थे। कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान भी इस गुफा की खोज का प्रयास किया गया था, लेकिन अंदर ऑक्सीजन की कमी के चलते लोग कुछ कमरों से आगे नहीं जा सके।

मंदिर के आसपास कई बीघा में फैला घना जंगल है और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

फिलहाल आग पूरी तरह बुझ चुकी है, लेकिन घटना को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर मामले की पड़ताल की जा रही है, हालांकि अभी तक आग लगने के पीछे का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। इस अनोखी घटना ने पूरे इलाके में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ कौतूहल भी बढ़ा दिया है।

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