उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को देहरादून और ऋषिकेश में अवैध निर्माण पर रोक लगा दी तथा गढ़वाल के आयुक्त को पांच मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया कि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) किस प्रकार से इन दोनों शहरों में स्वीकृत मानचित्रों का उल्लंघन कर किए जा रहे निर्माण की ‘कंपाउडिंग (शुल्क लेकर वैध करना)’ कर रहा है।

मुख्य न्यायाधीश जी नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने पूछा कि एमडीडीए स्वीकृत मानचित्रों का उल्लंघन कर किए जा रहे निर्माणों की कैसे ‘कंपाउंडिंग’ कर रहा है।

अदालत ने गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय को पांच मई को अदालत में पेश होकर इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा। ऋषिकेश निवासी पंकज अग्रवाल एवं कुछ अन्य लोगों ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर दावा किया था कि देहरादून एवं ऋषिकेश में स्वीकृत मानचित्रों का उल्लंघन कर कई निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि एमडीडीए उक्त निर्माणों को सील करने की कार्रवाई कर रहा है लेकिन कुछ समय बाद एमडीडीए के सहायक अभियंता सीलिंग हटा देंगे और निर्माणों को कंपाउंड कर देंगे। याचिकाकर्ता ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए अवैध निर्माण को रोका जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights