उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने से एक दिन पहले आज चमोली जिले के गोविन्दघाट से पंजप्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था गुरुद्वारे के लिए रवाना हो गया । भीषण ठंड और बर्फबारी के कारण सर्दियों में बंद रहने के बाद हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

बदरीनाथ के समीप गोविंदघाट में परम्परागत पूजा अर्चना करने के बाद बैण्ड-बाजों की मधुर धुनों के बीच पवित्र निशान साहिब के साथ सिखों का पहला जत्था गुरुद्वारे के लिए निकला। इस अवसर पर ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों के साथ पूरा इलाका गुंजायमान हो उठा।

जत्थे की अगुवाई पंजप्यारों द्वारा की गई जो सिख परंपरा में श्रद्धा, सेवा और साहस के प्रतीक माने जाते हैं। श्रद्धालु 14 किमी की दूरी पर स्थित घांघरिया में रात्रि प्रवास के बाद शनिवार सुबह हेमकुंड साहिब पहुंचेंगे। परंपरानुसार प्रथम जत्थे के पवित्र धाम पहुंचने के बाद विधि-विधान एवं अरदास के साथ हेमकुंड साहिब के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।

चमोली पुलिस ने बताया कि यात्रा को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और संपूर्ण यात्रा मार्ग पर पुलिस बल तैनात किया गया है। हेमकुंड साहिब के लिए बदरीनाथ से लगभग 15 किलोमीटर पहले गोविन्दघाट से यात्रा शुरू होती है जिसके लिए 18 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करनी पड़ती है।

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