अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग को 9 अप्रैल तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है. ट्रंप अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत विदेशी युद्धों में अमेरिकी दखल कम करना चाहते हैं और इस दिशा में उन्होंने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और करीब 15 मुद्दों पर सहमति बन चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित बातचीत की खबरें हैं.

ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ‘इस बार ईरान वाकई गंभीर है, वे शांति चाहते हैं. हम उन्हें 5 दिन का समय देंगे.’ Axios की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात की है.

आसिम मुनीर ने ट्रंप से फोन पर की बात

पाकिस्तान आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर विस्तृत बातचीत की. फाइनेंशियल टाइम्स और रॉयटर्स जैसी रिपोर्ट्स में पाकिस्तान को इस संकट में प्रमुख मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है. तुर्किए और मिस्र भी मैसेंजर की भूमिका निभा रहे हैं. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ट्रंप को ‘धोखेबाज राष्ट्रपति’ करार देते हुए कहा कि उनका बयान ईरान का ध्यान नहीं भटका सकता. हालांकि, ईरान ने पहले बातचीत से इनकार किया था, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच चर्चा चल रही है.

समझौता हुआ तो तेजी से गिरेंगी तेल की कीमतें

ट्रंप ने कहा, “हमने ईरान में वह सब कुछ खत्म कर दिया है जिसे खत्म किया जा सकता था. अगर समझौता हो गया तो तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी.” उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान का नेतृत्व लगभग पूरी तरह से कमजोर हो चुका है और अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोज्तबा खामेनेई लापता बताए जा रहे हैं. अमेरिका की ओर से युद्ध समाप्ति के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हफ्ते इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हो सकती है. इजरायली मीडिया ने बताया कि संपर्क प्रक्रिया चल रही है और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हो सकते हैं.

जयशंकर की रुबियो से फोन पर हुई बातचीत

इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से फोन पर बात की. चर्चा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष और उससे ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव पर केंद्रित रही. दोनों ने संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई.

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