यूपी के मथुरा में नामचीन बीड़ी कारोबारी सुरेश चंद अग्रवाल और उनके बेटे नरेश की मौत से पूरा इलाका सदमे में है. एक मामूली पारिवारिक विवाद ने ऐसी खौफनाक शक्ल ली कि पिता-पुत्र दोनों की जान चली गई. शराब पीने की लत को लेकर पिता-पुत्र के बीच झगड़ा हुआ, जिसके बाद बेटे नरेश ने अपने पिता को गोली मार दी और फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली. 

बता दें कि यह दुखद घटना मथुरा के थाना वृंदावन कोतवाली इलाके के गोरा नगर में हुई. घटना बीड़ी कारोबारी सुरेश चंद अग्रवाल और उनके बेटे नरेश अग्रवाल के साथ घटी. शराब पीने का विरोध करने पर यह विवाद शुरू हुआ. पुत्र नरेश ने पिता सुरेश चंद्र को लाइसेंस रिवाल्वर से गोली मार दी और उसके बाद खुद को भी गोली मार ली. इस घटना में दोनों पिता-पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई. 

स्थानीय लोगों और पुलिस के अनुसार, सुरेश चंद्र अग्रवाल अपने बेटे नरेश को शराब पीने के लिए बार-बार मना करते थे. इसे लेकर पिता और पुत्र के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका था. अंतिम बार हुए इस विवाद में गुस्साए बेटे नरेश ने अपने पिता को गोली मार दी.  इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन में जुटी हुई है. 

कैंसर से लड़े पर बेटे के आगे हारे पिता

सुरेश चंद्र अग्रवाल काफी समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. उन्होंने इस घातक बीमारी से तो लड़ाई जीत ली, लेकिन अपने बेटे से हार गए. परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह अपने बेटे नरेश को बहुत प्यार करते थे, लेकिन शराब पीने की लत ने इस पिता-पुत्र की जोड़ी को हमेशा के लिए तोड़ दिया. उनकी अंत्येष्टि शनिवार को गमगीन माहौल में की गई, जिसमें पहुंचे व्यापारियों और परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं. 

आटा चक्की से हजारों करोड़ तक का सफर

बीड़ी कारोबारी सुरेश चंद्र अग्रवाल ने अपने कारोबार की नींव 1977 में रखी थी. उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से ‘दिनेश बीड़ी’ के नाम से अपना कारोबार बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, और उत्तर प्रदेश के कई राज्यों में फैलाया. उन्होंने अपने बीड़ी कारोबार की नींव 1977 में रखी थी. शुरुआत में उन्होंने शिवपुरी के जंगलों में जाकर बीड़ी के पत्ते भी जुटाए थे. 

बताया जाता है कि उनकी कंपनी की वैल्यू हजारों करोड़ रुपये की है. कारोबार शुरू करने से पहले, वह शालिग्राम मंदिर के नीचे एक छोटी सी आटा चक्की चलाते थे. उन्होंने सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दिया. 

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