समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान इन दिनों जेल में बंद हैं. उनके साथ उनके बेटे, सपा नेता, पूर्व विधायक अब्दुल्लाह आजम भी जेल में ही हैं. दोनों नेता पैन कार्ड मामले में साल की 7 सजा के चलते जेल में हैं.  इन सबके बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यूपी की सियासत में आजम खान का दौर खत्म हो चला है? न सिर्फ यूपी की सियासत बल्कि सपा के संगठनात्मक ढांचे में भी उनकी स्थिति कमजोर होने के दावे किए जा रहे हैं. इसके पीछे बीते कुछ महीनों में हुए अहम सियासी बदलाव हैं.

पहला बदलाव उस वक्त देखने को मिला जब बहुजन समाज पार्टी की सरकार में दर्जा मंत्री रह चुके सुरेंद्र सागर को सपा में प्रदेश सचिव का दर्जा मिला. सागर की सियासत का केंद्र रामपुर और मुरादाबाद है. इन दोनों ही जिलों में एक जमाने में आजम खान की सहमति के बिना सपा में कोई फैसला नहीं होता था. जब सागर की नियुक्ति हुई तब यह कहा जाने लगा कि सपा आलाकमान ने बिना आजम खान या उनके करीबियों को बताए यह फैसला लिया है.

दूसरा बदलाव है नसीमुद्दीन सिद्दिकी की सपा में ज्वाइनिंग. सपा में आजम खान के अलावा बड़ा मुस्लिम चेहरा फिलहाल नहीं है. हालांकि सिद्दिकी की एंट्री के बाद माना जा रहा है कि वह आजम की जगह भर सकते हैं. बसपा सरकार में मंत्री रह चुके सिद्दिकी, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के करीबी माने जाते रहे हैं. हालांकि पार्टी छोड़ते वक्त मायावती और सिद्दिकी के बीच तल्खियां इतनी बढ़ गईं कि सपा नेता ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग तक जारी कर दी थी, जिसकी उस वक्त बहुत चर्चा हुई थी.

आजम पर अखिलेश यादव ने क्या-क्या कहा?

इन्हीं सब चर्चाओं और अटकलों पर अब समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने साफ किया है कि सपा में जो दर्जा आजम खान का है, वह किसी का नहीं हो सकता है. एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में सपा नेता से पूछा गया – सुरेंद्र सागर को आपने सपा का सचिव चुना है तो क्या आजम खान दौर खत्म है?

इसके जवाब में कन्नौज सांसद ने कहा- आजम खान का स्थान सबसे ऊपर रहेगा, उनका सम्मान सबसे ज्यादा है. कोई आया है, कोई बन गया है, वह पार्टी को मजबूत करने के लिए आया है. अगर नसीमुद्दीन सिद्दिकी भी आए हैं तो पार्टी को मजबूत करने के लिए आए हैं.वह आजम खान को मदद करने के लिए आए हैं. अगर कोई नेता रामपुर में भी आया है, वह समाजवादी पार्टी को ही मजबूत करने के लिए और आजम खान की सब सीटें जीत जाएं, उसके लिए ही काम करेगा.

आजम खान के क्षेत्र में कांग्रेस की सक्रियता के मायने?

अखिलेश का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के दो नेता- अजय राय (यूपी कांग्रेस अध्यक्ष) और पूर्व विधायक संजय कपूर ने आजम खान के परिजनों से मुलाकात की.

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की पत्नी से मुलाकात के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा था , ‘मैंने आजम खान के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उन्हें ईद की मुबारकबाद दी है.’ संजय कपूर ने भी कहा था कि वह आजम खान के परिवार से मिलने और उनका हालचाल जानने के लिए यहां आए थे.

कौन होगा शीत युद्ध का विजेता?

हालांकि राजनीतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस की यूपी इकाई, आजम खान को लेकर सपा के साथ प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही है. यूपी कांग्रेस में फिलहाल ऐसा कोई मुस्लिम चेहरा नहीं है जो इस वर्ग के मतों को पार्टी की ओर खींच सके. कांग्रेस की कोशिश है कि वह आजम के बहाने ही सही, मुस्लिमों में यह संदेश दे कि वह सपा से ज्यादा इस वर्ग और उनके नेता के साथ है.

रमजान और ईद के मौके पर आजम खान के घर कांग्रेस के दो बड़े चेहरे पहुंचे हालांकि सपा का कोई बड़ा नेता उनके घर तक नहीं गया. बता दें 2025 में आजम खान जब जेल से बाहर आए थे तब उन्होंने कहा था- मेरी पत्नी ईद के दिन अकेली बैठकर रोती रही. इतने समय में किसी ने हमारे परिवार का हाल तक नहीं पूछा.

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आजम खान और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर यूपी कांग्रेस और सपा में जो शीत युद्ध चल रहा है उसका विजेता कौन होगा? इतना तो तय है कि सियासत अजब शय है जहां ऐसी मुलाकातें और बयान, केवल हालचाल तक सीमित नहीं रहतीं, उसके अपने कई मायने और संदेश होते हैं.

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