राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और फ्यूल की खपत को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी सिस्टम में कई नए बदलाव लागू करने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों का मकसद पेट्रोल-डीजल की बचत करना, ट्रैफिक कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है।

नई नीति के तहत अब सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले मासिक पेट्रोल और डीजल कोटे में 20 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। पहले कई वरिष्ठ अधिकारियों को हर महीने 200 से 250 लीटर तक ईंधन दिया जाता था, लेकिन अब यह घटाकर 160 से 200 लीटर कर दिया गया है।

हफ्ते में दो दिन Work From Home
सरकार का मानना है कि इससे सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल केवल जरूरी कामों तक सीमित रहेगा और अनावश्यक यात्राओं पर रोक लगेगी। इससे सरकारी खर्च में भी कमी आएगी और आम लोगों को ईंधन बचाने का संदेश मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में दो दिन Work From Home लागू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करना होगा। सरकार ने निजी कंपनियों से भी इसी मॉडल को अपनाने की अपील की है ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो सके।

सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से हर महीने लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकती है। साथ ही ट्रैफिक जाम में कमी आने और प्रदूषण स्तर घटने की भी उम्मीद जताई जा रही है। दिल्ली सरकार ने एक नई पहल Metro Monday भी शुरू की है। इसके तहत सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हर सोमवार को मेट्रो से सफर करेंगे। इस कदम का उद्देश्य लोगों को Public Transportation के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना और VIP vehicles की संख्या कम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर सरकारी स्तर पर ईंधन बचत की शुरुआत होगी तो आम लोग भी इससे प्रेरणा लेंगे। सरकार आने वाले समय में और भी ऐसे कदम उठा सकती है जो पर्यावरण संरक्षण और खर्चों में कमी लाने में मददगार साबित हों।

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