समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सड़कों पर नमाज पढ़ने के खिलाफ टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य में ज्यादातर कार्यक्रम सड़कों पर ही होते हैं, क्योंकि जगह की कमी है, और ऐसे मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लखनऊ में एक सभा में कहा कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि संविधान हम सभी को समान अधिकार देता है। उत्तर प्रदेश में सभी कार्यक्रम सड़कों पर ही होते हैं, जिसमें हमारी यह प्रेस कॉन्फ्रेंस भी शामिल है। सरकार भी अपने कार्यक्रम सड़कों पर ही आयोजित करती है क्योंकि वे उचित व्यवस्था नहीं करते।

अखिलेश यादव ने आगे कहा कि लखनऊ को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, फिर भी यहां यातायात धीमा चलता है। किसी के धर्म का अपमान और भेदभाव नहीं होना चाहिए। संविधान हम सभी को समान अधिकार देता है। संसद ने भाजपा पर भी हमला करते हुए दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी चाहती है कि लोग इस तरह की बहसों में उलझें। अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी सड़कों का चौड़ीकरण चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर ऐसे मुद्दे उठा रही है ताकि जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि बहस जन मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए, लेकिन भाजपा इसे दूसरी दिशा में मोड़ना चाहती है।

अखिलेश का यह जवाब योगी आदित्यनाथ की उस चेतावनी के बाद आया है जिसमें उन्होंने सड़कों पर नमाज़ पढ़ने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि ऐसी धार्मिक प्रथाएं निर्धारित पूजा स्थलों पर बारी-बारी से अदा की जानी चाहिए। सोमवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार नमाज़ या किसी भी अन्य धार्मिक गतिविधि के लिए सड़कों को अवरुद्ध नहीं होने देगी।

उन्होंने कहा कि सड़कें आवागमन के लिए हैं, तमाशा करने के लिए नहीं। किसी को सड़क अवरुद्ध करने का क्या अधिकार है? लोगों को प्रार्थना करने के लिए अपने निर्धारित पूजा स्थलों पर जाना चाहिए। मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां ईद-उल-अधा से पहले आई हैं, जो 28 मई को मनाई जाएगी। आदित्यनाथ ने कहा कि उन्होंने समुदाय को सलाह दी है कि यदि आवश्यक हो तो वे बारी-बारी से नमाज़ अदा करें। उन्होंने कहा कि यदि आपके घरों में सभी के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, तो जनसंख्या नियंत्रण पर भी विचार किया जाना चाहिए।

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