राजनीति और कूटनीति की दुनिया में एक कहावत है कि पुराना दोस्त हमेशा सबसे अच्छा होता है। भारत के लिए रूस वही पुराना और सबसे भरोसेमंद दोस्त है जिसने हर मुश्किल में भारत का साथ दिया। लेकिन 2 मई को जब दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के तनाव पर है तब हमारे दोस्त रूस से एक परेशान करने वाली खबर आई। रूस की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनियों में से एक को यूक्रेन के ड्रोंस ने निशाना बनाया है। पिछले कुछ दिनों में यह उसका यानी यूक्रेन का चौथा हमला है। यह सिर्फ यूक्रेन के ड्रोन नहीं है बल्कि इसके पीछे की सोच वाशिंगटन की है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर रूस की अर्थव्यवस्था की रीड कहे जाने वाले तेल ठिकानों को बर्बाद किया जा रहा है। पुतिन और ट्रंप के बीच 90 मिनट की बातचीत हुई जिसमें तनाव साफ दिखा और फिर रूस के 10 बड़े तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया। लेकिन अमेरिका को याद रखना चाहिए कि अगर रूस का तेल जला तो इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करेगी और भारत का दोस्त रूस अकेला नहीं है।

होर्मुज की खाड़ी यहां अमेरिका के 19 घातक युद्धपोत तैनात है। जिन्होंने ईरान का रास्ता रोकने की कोशिश की। लेकिन ईरान ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सूत्रों का दावा है कि ईरान ने अमेरिका के इस ब्लॉकेट को तोड़ने के लिए एक खुफिया रणनीति बनाई है। इस रणनीति में ईरान के साथ रूस के युद्ध एक्सपर्ट और चीन के जासूस सेटेलाइट शामिल है। ईरान ने यह साफ कर दिया है कि अगर यह घेराबंदी नहीं हटी तो अमेरिका के यह 19 जहाज समंदर की गहराई में होंगे। अब अमेरिका डरा हुआ है। क्यों? क्योंकि इसकी वजह है ईरान की मिसाइल तकनीक। हाल ही में अमेरिकी वाइट हाउस में एक हाई लेवल मीटिंग होती है। सेंट कॉम के चीफ ब्रैट कूपर ने डोनाल्ड ट्रंप को ब्रीफ किया कि ईरान की मिसाइलें साधारण नहीं है। वे एमआईआरवी यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल तकनीक से लैस है। यानी एक मिसाइल जो हवा में अपना रास्ता बदल सकती है और जिसे कोई भी डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकता है।

इसी वजह से अमेरिका अब डार्क ईगल जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें मांग रहा है जिसकी रफ्तार 6000 किमी/ घंटे से ज्यादा है। इस युद्ध का असर अब पड़ोसियों पर भी दिखने लगा। पाकिस्तान में तेल का हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच ईरान ने एक मास्टर स्ट्रोक खेला। अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को धता बताते हुए ईरान ने कजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के रास्ते रेल मार्ग से चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है। यह वही रूट है जिसे अमेरिका कभी ब्लॉक नहीं कर पाएगा। अब साल 2006 में शुरू हुआ यह सपना हकीकत बनता दिख रहा है जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को नई ऑक्सीजन मिल चुकी है। अब तनाव सिर्फ मिडिल ईस्ट में नहीं है। अमेरिका के विदेश मंत्री मोको रूबियो और चीन के वोंग ई के बीच फोन पर जो बातचीत हुई उसने आग में घी डालने का काम किया। चीन ने अमेरिका को दो टूक शब्द ने कहा कि ट्रंप बीजिंग आए उनका स्वागत है।

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