उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवता और चिकित्सा जगत को शर्मसार कर दिया है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर की कथित लापरवाही के कारण एक 5 साल की मासूम बच्ची को अपना पैर गंवाना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

कैसे शुरू हुआ दर्दनाक सिलसिला?
घटना की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। शहर कोतवाली क्षेत्र के पडुयी गांव के रहने वाले अनिल कुमार की 5 साल की बेटी छत से गिर गई थी, जिससे उसके बाएं पैर की हड्डी टूट गई थी। पिता अपनी मासूम बेटी को इलाज के लिए उम्मीद के साथ रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले गए। उन्हें क्या पता था कि यहां उनकी बेटी का जीवन हमेशा के लिए बदलने वाला है।

नसें हुईं ब्लॉक, फैला इंफेक्शन
बच्ची के पिता का आरोप है कि अस्पताल में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने इलाज के दौरान घोर लापरवाही बरती। बच्ची के टूटे हुए पैर को नीचे से इतनी जोर से और गलत तरीके से बांध दिया गया कि उसके पैरों की नसों ने काम करना बंद कर दिया। रक्त संचार रुकने और गलत तरीके से पट्टी बांधने के कारण पैर में संक्रमण (इंफेक्शन) फैलने लगा। 29 दिसंबर को जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन का प्लान बनाया और बच्ची को ऑपरेशन थिएटर ले गए, तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए डॉक्टरों ने आनन-फानन में बच्ची को हायर सेंटर (लखनऊ) रेफर कर दिया और परिजनों से कहा कि बच्ची की हालत खतरे में है।

लखनऊ में काटना पड़ा पैर
परिजनों ने बच्ची को तुरंत लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गलत इलाज के कारण संक्रमण इतना ज्यादा फैल चुका है कि बच्ची की जान बचाने के लिए पैर काटना ही एकमात्र रास्ता है। अंततः 5 साल की मासूम का पैर काट दिया गया, जिससे वह जीवन भर के लिए दिव्यांग हो गई।

लंबी लड़ाई के बाद दर्ज हुई FIR
पीड़ित पिता अनिल कुमार ने न्याय के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के चक्कर लगाए, लेकिन शुरू में मामला दबाने की कोशिश की गई। अंत में, उन्होंने एसपी (SP) पलाश बंसल से न्याय की गुहार लगाई। डीएम (DM) के निर्देश पर मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) द्वारा गठित टीम ने जब मामले की जांच की, तो डॉक्टर की लापरवाही की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अब असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

प्रशासन का बयान
बांदा पुलिस और जिला प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी के आदेश पर सीएमओ द्वारा एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस रिपोर्ट में डॉक्टर की लापरवाही स्पष्ट पाए जाने के बाद सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विधिक कार्रवाई जारी है और दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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