आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक हम घंटों मोबाइल की स्क्रीन देखते रहते हैं – चाहे वह ऑफिस का काम हो, सोशल मीडिया, वीडियो देखना हो या ऑनलाइन शॉपिंग। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस आदत से हमारी आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है?
डॉक्टर्स का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर देखने से आंखों की सेहत धीरे-धीरे खराब होने लगती है और कई गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के आई एक्सपर्ट डॉ. ए. के. ग्रोवर के अनुसार, मोबाइल का अत्यधिक उपयोग आंखों के लिए खतरनाक बनता जा रहा है।
डिजिटल आई स्ट्रेन
जब हम घंटों मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट स्क्रीन को बिना रुके देखते हैं, तो आंखों में जलन, थकावट, भारीपन और दर्द होने लगता है। कई बार धुंधला दिखाई देता है और सिर में दर्द भी हो सकता है।
लक्षण:आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधली नजर, आंखों में भारीपन
ड्राई आई सिंड्रोम
मोबाइल देखते वक्त हम सामान्य से कम बार पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की नमी कम होने लगती है। इससे आंखें सूखने लगती हैं और चुभन महसूस होती है।
लक्षण: आंखों में सूखापन, लाल होना, चुभन या जलन, रोशनी में आंखें खोलने में परेशानी
ब्लू लाइट डैमेज
मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) सीधे आंखों की रेटिना को प्रभावित करती है, जिससे रेटिना की कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब हो सकती हैं। इससे मैक्युलर डिजेनेरेशन जैसी बीमारी हो सकती है।
लक्षण: नजर कमजोर होना, आंखों में थकान, लंबे समय तक देखने में परेशानी
मायोपिया
इसे आम भाषा में ‘नजर कमजोर होना’ कहते हैं, खासकर दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं। मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों और युवाओं में इस बीमारी को तेजी से बढ़ा रहा है।
लक्षण: दूर की चीजें साफ नहीं दिखतीं, स्क्विन्टिंग यानी आंखें मिचमिचाकर देखना, बार-बार आंखों को रगड़ना, सिरदर्द
फोटोफोबिया
जब आंखें तेज रौशनी या सूरज की रौशनी में चुभने लगें, तो यह फोटोफोबिया हो सकता है। स्क्रीन की ब्राइटनेस अधिक रखने से आंखों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
लक्षण: तेज रौशनी में आंखें बंद करने की इच्छा, चुभन या जलन, आंखों में दर्द
कैसे बचें इन आंखों की समस्याओं से?
डॉ. ग्रोवर ने आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान सुझाव दिए हैं:
- 20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को 20 सेकंड तक देखें।
- स्क्रीन टाइम को सीमित करें, खासकर बच्चों के लिए।
- मोबाइल में ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें।
- आंखों को बार-बार झपकाएं और अच्छी रौशनी में ही स्क्रीन देखें।
- समय-समय पर आंखों की जांच कराएं और विशेषज्ञ से सलाह लें।
