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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या उनके सलाहकारों ने इस साल के शुरुआती तीन महीनों में 3700 से ज्यादा स्टॉक ट्रेड किए. इस खुलासे के बाद ट्रंप पर नई जांच शुरू हो गई है. ट्रेडिंग एक्टिविटी के इस लेवल ने वॉल स्ट्रीट के धुरंधरों को भी हैरान कर दिया है. इससे वॉशिंगटन में हितों के टकराव की चिंता फिर से बढ़ गई है.

ब्लूमबर्ग ने सबसे पहले इन खुलासों की रिपोर्ट दी थी, जिसमें अमेरिका की कुछ सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, एयरोस्पेस और मीडिया कंपनियों में करोड़ों डॉलर की ट्रेडिंग एक्टिविटी दिखाई गई थी. आसान शब्दों में कहें तो, इस साल जनवरी और मार्च के बीच ट्रंप ने औसतन हर दिन 40 से ज़्यादा ट्रेड किए. यह पिछली तिमाही से एक बड़ी उछाल है, जब 2025 के आखिरी तीन महीनों में करीब 380 ट्रेड्स का खुलासा हुआ था.

शेयर मार्केट के एक्सपर्ट्स इस लेवल के ट्रेड से काफी हैरान हैं. ब्लूमबर्ग से बात करते हुए मार्केट एक्सपर्ट मैथ्यू टटल ने कहा कि यह बहुत ज्यादा ट्रेड है. उन्होंने कहा, ‘यह लगभग बड़े पैमाने पर एल्गो ट्रेड वाले हेज फंड जैसा है.’

किन-किन कंपनियों में ट्रंप ने किया इन्वेस्टमेंट?

खुलासे से पता चला है कि ट्रंप ने इस तिमाही NVIDIA, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, बोइंग और कॉस्टको जैसी कंपनियों में कम से कम एक मिलियन यूएस डॉलर के शेयर खरीदे. फाइलिंग में अमेज़न, मेटा, Uber, eBay, एबॉट लेबोरेटरीज, AT&T और डॉलर ट्री जैसी कंपनियों से जुड़े ट्रेड भी शामिल थे. सबसे बड़े खुलासे वाले लेन-देन में से एक 10 फरवरी को हुआ, जब ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेज़न में USD 5 मिलियन से USD 25 मिलियन के बीच की होल्डिंग्स बेचीं. इसके अलावा नेटफ्लिक्स, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी और पैरामाउंट ग्लोबल जैसी बड़ी मीडिया और एंटरटेनमेंट डील्स में शामिल कंपनियों से जुड़े इन्वेस्टमेंट का भी पता चला है.

इनमें से कई कंपनियां ऐसे सेक्टर में काम करती हैं, जो सीधे अमेरिकी सरकार की पॉलिसी, रेगुलेशन और जियोपॉलिटिकल फैसलों से प्रभावित होती हैं. उदाहरण के लिए Nvidia को चीन को एडवांस्ड AI चिप्स एक्सपोर्ट करने के लिए वाशिंगटन से मंजूरी की जरूरत होती है. बोइंग US सरकार से जुड़े डिफ़ेंस और एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्ट पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. Microsoft, Amazon और Meta जैसी बड़ी टेक कंपनियां लगातार एंटीट्रस्ट जांच, AI रेगुलेशन बहस और फेडरल पॉलिसी फैसलों से प्रभावित होती हैं.

आलोचकों का क्या कहना है?

आलोचकों का कहना है कि भले ही कोई कानून न तोड़ा गया हो, लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति की इस तरह की एग्रेसिव ट्रेडिंग एक्टिविटी से संभावित कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं. पिछले कई अमेरिकी प्रेसिडेंट्स के उलट, ट्रंप ने अपने बिजनेस इंटरेस्ट को पूरी तरह से नहीं बेचा या उन्हें किसी ट्रेडिशनल ब्लाइंड ट्रस्ट में नहीं डाला, जिसे परिवार के शामिल हुए बिना इंडिपेंडेंटली मैनेज किया जाता हो. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ट्रंप के बिजनेस उन इंडस्ट्रीज में चल रहे हैं जिन पर सरकारी पॉलिसी फैसलों का असर पड़ा है, जबकि उनके बेटे ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के बड़े हिस्से को देखते हैं.

ट्रंप के बयानों से शेयर मार्केट पर हुआ असर

ये नए खुलासे तेल और स्टॉक फ्यूचर्स मार्केट में अजीब ट्रेडिंग एक्टिविटी के कुछ ही महीनों बाद हुए हैं, जिससे ईरान पर ट्रंप के पब्लिक कमेंट्स से जुड़ी अंदर की जानकारी के बारे में अटकलें लगने लगी थीं. इस साल की शुरुआत में, खबर है कि ट्रेडर्स ने तेल की गिरती कीमतों और बढ़ते US इक्विटी मार्केट पर बड़े पैमाने पर दांव लगाया था, इससे ठीक पहले ट्रंप ने ईरान से जुड़ी बातचीत में प्रोग्रेस का सुझाव दिया था. उन बातों के तुरंत बाद, तेल की कीमतें गिर गईं, जबकि स्टॉक मार्केट में तेज़ी से उछाल आया, जिससे ऑनलाइन अटकलें तेज़ हो गईं और मार्केट से जुड़ी पॉलिटिकल जानकारी पर नई बहस शुरू हो गई. हालांकि ट्रंप को सीधे उन ट्रेड से जोड़ने का कोई सबूत पब्लिक में सामने नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने इस बारे में बड़ी चिंता बढ़ा दी है कि कैसे सेंसिटिव पॉलिटिकल डेवलपमेंट फाइनेंशियल मार्केट से जुड़ सकते हैं.

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