अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और सैन्य गतिविधियों ने पश्चिम एशिया में नए युद्ध की आशंका बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई सैन्य परिवहन विमान, जिनमें C-17A एयरफोर्स विमान शामिल हैं, मध्य एशिया से यूरोप की ओर उड़ान भर चुके हैं। बताया जा रहा है कि 28 फरवरी के अमेरिकी हमले से पहले भी इसी तरह की गतिविधियां देखी गई थीं।

रिपोर्टों के अनुसार पेंटागन ने कई सैन्य विकल्प तैयार कर रखे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अगर हमला हुआ तो इस बार सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि ईरान के संभावित यूरेनियम भंडार और परमाणु ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि पिछले संघर्ष के दौरान कुछ परमाणु सामग्री भूमिगत हिस्सों में सुरक्षित रह गई थी। इस बीच ट्रंप ने चीन से लौटते वक्त ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “तबाही” हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिका की किसी भी कार्रवाई का “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा। ईरानी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वह सैन्य दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उधर पाकिस्तान भी इस संकट में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री तेहरान पहुंच चुके हैं और वहां वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। हालांकि अब तक अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस समझौते के संकेत नहीं मिले हैं।

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