वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत की तेल भंडारण क्षमता को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में भारत के पास लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल रिजर्व में मौजूद है। यह भंडार किसी भी आकस्मिक स्थिति या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
कैसे तैयार हुआ 60 दिनों का यह बैकअप?
भारत अपनी तेल सुरक्षा को दो प्रमुख स्तरों पर मजबूत कर रहा है:
-
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR): भारत ने विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पाडुर (कर्नाटक) में विशाल भूमिगत चट्टानी गुफाएं बनाई हैं, जहाँ लाखों टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा गया है। यह लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी करता है।
-
रिफाइनरी स्टॉक: देश की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों के पास हमेशा एक निश्चित मात्रा में कच्चे तेल और तैयार उत्पादों (पेट्रोल, डीजल आदि) का भंडार होता है, जो लगभग 50-51 दिनों की आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
-
कुल सुरक्षा चक्र: इन दोनों को मिलाकर भारत के पास लगभग 2 महीने (60 दिन) का सुरक्षित स्टॉक उपलब्ध है।
वैश्विक संकट के बीच क्यों अहम है यह बयान?
पेट्रोलियम मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व (Middle East) और अन्य क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है:
-
बाजार में स्थिरता: इस जानकारी से घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को लेकर होने वाली घबराहट (Panic) कम होगी।
-
आत्मनिर्भरता: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85% आयात करता है, ऐसे में 60 दिनों का रिजर्व एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
-
भविष्य की योजना: सरकार दूसरे चरण में ओडिशा के चंडीखोल और पाडुर में और अधिक रणनीतिक भंडार बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे यह क्षमता और बढ़ जाएगी।
अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त तेल भंडार होने से न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में भी मदद करता है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल आयात के विकल्पों को भी लगातार विस्तार दे रहा है।
इस बड़े खुलासे के बाद औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में सकारात्मक संकेत देखे जा रहे हैं, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को प्रदर्शित करते हैं।
