मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरानी तेल को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा विवाद सामने आया है. जहां एक तरफ अमेरिकी प्रशासन ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि उसके पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए न तो कच्चा तेल उपलब्ध है और न ही कोई अतिरिक्त भंडार. इस विरोधाभास ने पहले से अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है.

ईरान ने किया इनकार

मुंबई स्थित ईरान के दूतावास द्वारा जारी बयान में कहा गया कि फिलहाल ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है और न ही कोई अतिरिक्त भंडार है. ईरानी तेल मंत्रालय ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्री के बयान का मकसद बाजार को शांत करना और खरीदारों को आश्वस्त करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह रुख संकेत देता है कि या तो उसकी आपूर्ति बाधित है या वह रणनीतिक कारणों से अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करना चाहता.

अमेरिका की अस्थायी राहत नीति

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हाल ही में घोषणा की कि ईरानी मूल के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी जाएगी. यह छूट 19 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी. इस फैसले के तहत उन जहाजों पर लदे ईरानी तेल की बिक्री, डिलीवरी और अनलोडिंग की अनुमति दी गई है, जो 20 मार्च 2026 तक समुद्र में फंसे हुए थे. इसमें कुछ मामलों में अमेरिका में आयात की अनुमति भी शामिल है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम केवल सीमित दायरे में और अल्पकालिक है, जिसका उद्देश्य बाजार में तत्काल आपूर्ति दबाव को कम करना है.

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