नई दिल्ली । यमन की राजधानी सना में इज़राइल ने गुरुवार को बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें हूती-नियंत्रित सरकार के प्रधानमंत्री अहमद ग़लेब अल-रहावी की मौत हो गई। इस हमले में विदेश, ऊर्जा और सूचना मंत्रालय समेत कई कैबिनेट मंत्री भी मारे गए, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हुए।

सूत्रों के मुताबिक यह हमला तब हुआ जब हूती सरकार की उच्चस्तरीय बैठक चल रही थी। बैठक में प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पिछले वर्ष की गतिविधियों और कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उसी दौरान इज़राइली विमानों ने लक्षित बमबारी की। हूती प्रवक्ता ने शनिवार, 30 अगस्त को इस घटना की आधिकारिक पुष्टि की।

इज़राइल की सेना ने इस कार्रवाई को सटीक और खुफिया जानकारी आधारित बताते हुए कहा कि निशाना बनाए गए अधिकारी इज़राइल विरोधी गतिविधियों में शामिल थे। इज़राइल के रक्षा मंत्री इस्राएल कट्ज़ ने इसे हूती नेतृत्व पर कड़ा प्रहार करार दिया और कहा कि यह केवल शुरुआत है।

प्रधानमंत्री अल-रहावी की मौत के बाद हूती नेतृत्व ने उनके डिप्टी मुहम्मद अहमद मिफ़्ताह को नया कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। हूती उपाध्यक्ष महदी अल-माशत ने कहा कि इस हमले का बदला लिया जाएगा और हम अपने घावों से ही विजय की इमारत खड़ी करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहराएगा, क्योंकि यह पहला मौका है जब इज़राइल ने सीधे हूती सरकार के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया है। अब तक केवल उनके सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर ही हमले होते रहे थे।

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