ईरान के साथ जारी युद्ध का असर इजरायल की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है, खासकर उसके हाई-टेक सेक्टर पर। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, करीब 50% टेक कंपनियां और स्टार्टअप्स कर्मचारियों की कमी के कारण अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पा रहे हैं।

कई कंपनियों ने टाले अपने नए प्रोडक्ट लॉन्च
सर्वे में यह भी सामने आया है कि हर चौथी कंपनी में 25% से ज्यादा कर्मचारी काम पर नहीं आ पा रहे हैं। इससे काम की रफ्तार धीमी हो गई है और लगभग 42% कंपनियों ने माना कि उनके प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। कई कंपनियों ने अपने नए प्रोडक्ट लॉन्च भी फिलहाल टाल दिए हैं। युद्ध की वजह से हवाई सेवाएं लगभग बंद हैं, जिससे 75% कंपनियों का काम प्रभावित हुआ है। जरूरी सामान मंगाने और उत्पाद विदेश भेजने में दिक्कत हो रही है। साथ ही, विदेशी निवेश पर निर्भर इस सेक्टर को फंडिंग मिलने में भी मुश्किलें आ रही हैं। करीब 71% कंपनियों ने कहा कि अब पूंजी जुटाना पहले से ज्यादा कठिन हो गया है।

कर्मचारियों की कमी के मुख्य कारण… 
रिजर्व ड्यूटी: हजारों इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल सेना में शामिल होकर मोर्चे पर चले गए हैं।
स्कूल-कॉलेज बंद: बच्चों की देखभाल के लिए माता-पिता को घर पर रहना पड़ रहा है।
सायरन और हमले: लगातार मिसाइल हमलों और सायरन से कर्मचारी मानसिक रूप से थक गए हैं।

दूसरे देशों में कारोबार शिफ्ट करने पर विचार कर रही टेक कंपनियां 
इस स्थिति के चलते करीब 31% टेक कंपनियां अब अपना कारोबार दूसरे देशों में शिफ्ट करने पर विचार कर रही हैं। वहीं, ईरान की अर्थव्यवस्था भी युद्ध से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच उसकी जीडीपी में 10% से ज्यादा गिरावट का अनुमान है। हमलों में बड़े स्टील प्लांट्स को नुकसान हुआ है, जिससे उद्योग पर असर पड़ा है। तेल उत्पादन और निर्यात भी प्रभावित हुआ है।

बढ़ रही महंगाई   
महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते ईरान के केंद्रीय बैंक ने 10 मिलियन रियाल का नया बड़ा नोट जारी किया है। युद्ध के माहौल ने निवेशकों का भरोसा भी कमजोर कर दिया है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights