यह एक ऐसी सच्ची प्रेम कहानी है, जो सिर्फ किताबों में नहीं, ज़िंदगी में भी देखी जाती है। मध्य प्रदेश के सागर जिले में रहने वाले एक बुज़ुर्ग दंपत्ति ने साथ जीने और साथ मरने की मिसाल पेश की। बीमार पत्नी के निधन के बाद जैसे ही पति ने उसकी डेड बॉडी देखी, वो गहरे सदमे में चला गया। चुपचाप एक कोने में जाकर बैठ गया और एक घंटे बाद जब बेटों ने देखा… तो पिता के प्राण निकल चुके थे। यह घटना न सिर्फ भावुक कर देने वाली है, बल्कि इस बात का गवाह भी है कि सच्चा प्यार उम्र, हालात और समय से कहीं बड़ा होता है।
 
बीमारी से जूझ रही थीं पत्नी, रास्ते में तोड़ा दम
बीते कई दिनों से शिवकुमारी रैकवार गंभीर रूप से बीमार थीं। परिवार ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए पहले विदिशा मेडिकल कॉलेज और फिर भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने जब जवाब दे दिया तो परिजन उन्हें घर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया।

पत्नी के जाने की खबर सुनते ही पति का भी निधन
जैसे ही बेटे अपनी मां के शव को लेकर घर पहुंचे और पिता नारायण रैकवार को यह दुखद समाचार मिला, वे स्तब्ध रह गए। चुपचाप एक कोने में जाकर बैठ गए और कुछ ही देर में वहीं गिर पड़े। परिजन जब तक कुछ समझ पाते, तब तक नारायण ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।

48 साल साथ निभाया, एक ही दिन विदा हुए
नारायण और शिवकुमारी की शादी को 48 साल हो चुके थे। इस दौरान दोनों ने जीवन के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ दिया। पत्नी के निधन के महज एक घंटे के भीतर नारायण का यूं चले जाना, इस गहरे प्रेम और जुड़ाव की अनकही कहानी कह गया।

अर्थी साथ सजी, चिता साथ जली
परिवार और ग्रामीणों ने दोनों की अर्थी एक साथ सजाई। जब श्मशान घाट पहुंचे, तो दोनों की चिताओं को पास-पास रखा गया। एक ही साथ मुखाग्नि दी गई। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।

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