रविकिशन, जिन्हें हर कोई पहचानता है, हाल ही में आईफा अवॉर्ड से सम्मानित हुए हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में सांसद रवि किशन की मजाकिया अंदाज में चुटकी ली। उन्होंने मजाक करते हुए यह सवाल किया कि क्या रवि किशन ने अपने दोस्तों और समर्थकों को इस विशेष अवसर पर दावत दी, या फिर किसी को भी भोजन पर नहीं बुलाया। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि सीएम योगी और रवि किशन के बीच यह चुटकुले अक्सर होते रहते हैं, जो दर्शकों के बीच हंसी की लहर पैदा करते हैं।

मंगलवार को गोरखपुर में हुए इस कार्यक्रम में, योगी आदित्यनाथ ने रवि किशन की मजाकिया चुटकी लेते हुए, दर्शकों को हंसाया। मुख्यमंत्री की इस चुटीली टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। यह नजारा दर्शाता है कि कैसे दोनों के बीच की दोस्ती और दोस्ताना माहौल लोगों को लुभाता है। रवि किशन खुद इस मजाक का आनंद ले रहे थे, जो उनकी मस्त मिजाजी और दर्शकों के साथ बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है।

इस तरह की मस्ती और हंसी-मजाक केवल राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक सकारात्मक संदेश देती है। गोरखपुर के इस कार्यक्रम में सीएम योगी और रवि किशन की केमेस्ट्री देखने लायक थी। ऐसा लगता है कि दोनों नेता एक-दूसरे के बीच की दोस्ती और सम्मान को हमेशा बनाए रखते हैं, जो वास्तव में एक सकारात्मक राजनैतिक संबंध को दर्शाता है।

इस प्रकार, योगी आदित्यनाथ और रवि किशन के बीच होने वाले ऐसे हल्के-फुल्के मजाक और टिप्पणियां जनता को मनोरंजन प्रदान करती हैं। इस बहाने जनता भी उन दोनों के बीच की इस दोस्ती का हिस्सा बन जाती है। लोगों के चेहरे पर हंसी लाने वाले ये पल किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हैं और नेता-जनता के बीच एक करीबी रिश्ता बनाते हैं।

इस वीडियो के माध्यम से दर्शक यह अनुभव कर सकते हैं कि कैसे योगी और रवि किशन की मित्रता और संयुक्त हंसी-मजाक ने वहाँ का माहौल खुशनुमा बना दिया। इस तरह की घटनाएं ना केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि आम जनता में भी विश्वास का संचार करती हैं, जिससे नेता और उनके समर्थक एक-दूसरे से और करीब आते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में न केवल मनोरंजन होता है, बल्कि यह संबंधों को मजबूती भी प्रदान करता है।

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