मीरजापुर, 21 सितम्बर । रामपुर सक्तेशगढ़ का रविवार कुछ अलग ही था। गांव का माहौल पूरी तरह दंगलमय बन गया। ढोल-नगाड़ों की थाप, अखाड़े में मिट्टी की खुशबू और पहलवानों के जोरदार दांव-पेंच ने लोगों को रोमांचित कर दिया।

पितृ विसर्जन के अवसर पर आयोजित इस परम्परागत कुश्ती दंगल में छोटे-बड़े सभी लोग उमंग और जोश से सराबोर दिखे। कार्यक्रम की शुरुआत विधायक रमाशंकर सिंह ने पहलवानों से हाथ मिलाकर की। आयोजन की कमान ग्राम प्रधान विद्याशंकर सिंह, राकेश सिंह और समाजसेवी राहुल सिंह ने ग्रामीणों के सहयोग से संभाली।

दंगल में 15 जोड़ियों के बीच मुकाबले हुए। मीरजापुर, वाराणसी और अन्य जनपदों से आए नामचीन पहलवानों ने अखाड़े में उतर कर अपनी ताकत और कला का जलवा बिखेरा। हर दांव के साथ दर्शकों की सांसें थम जातीं और जैसे ही कोई पहलवान दूसरे को पटखनी देता, तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठती। सबसे ज्यादा चर्चा वाराणसी डीएलडब्लू के रिंकू सिंह और राजातालाब के शिवम सिंह के बीच हुए आठ हजार रुपये की शर्त वाले मुकाबले की रही। सांस रोक देने वाली इस भिड़ंत में शिवम सिंह ने रिंकू को चित्त कर भीड़ का दिल जीत लिया।

–एक से बढ़कर एक मुकाबले

कछवा के सूर्यबली ने डीएलडब्लू के अजय को धूल चटाई। कछवा के ही सुनील और प्रदीप के बीच हुई जोरदार भिड़ंत बराबरी पर छूटी। वाराणसी के विजय पहलवान को मीरजापुर के रामबली ने शानदार तरीके से चित्त किया। अखाड़े में पहलवानों ने खजर, धिता, साल्टो, कालाजंग, ईरानी और धोबिपाट जैसे पारम्परिक दांव-पेच दिखाए। बच्चे जहां जोश से पहलवानों के नाम पुकारते रहे। वहीं बुजुर्ग पुरानी परम्पराओं को जीवंत होते देख गदगद नजर आए।

–खेल के साथ संस्कृति की झलक

कुश्ती दंगल सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि गांव की परंपरा और संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन था। मिट्टी से लथपथ पहलवानों की भिड़ंत ने सबको यह एहसास कराया कि आधुनिकता के दौर में भी गांव की संस्कृति और परम्परा आज भी उतनी ही मजबूत है। सैकड़ों की संख्या में जुटी भीड़ ने दंगल का भरपूर आनंद लिया और पितृ विसर्जन के उपलक्ष्य में आयोजित इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

By editor

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