राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को संसद के शीतकालीन सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है।

शनिवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर जानकारी दी कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मुने 1 दिसंबर 2025 से 19 दिसंबर, 2025 तक (संसदीय कार्य की अनिवार्यताओं के अधीन) संसद का शीतकालीन सत्र आयोजित करने के सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र रचनात्मक और सार्थक सत्रहोगा जो हमारे लोकतंत्र को मजबूत करे और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करे।

वहीं संसद के शीतकालीन सत्र की घोषणा होते ही इस राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता, सांसद जयराम रमेश ने इस सत्र के छोटे और देर से बुलाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा यह शीतकालीन सत्र इतनी देर से क्यों बुलाया गया। यह आमतौर पर 20 से 23 नवंबर और 24 दिसंबर के बीच आयोजित होता है और तीन से चार हफ़्ते तक चलता है।आश्चर्य है कि इस बार सत्र 1 दिसंबर से शुरू होगा और सिर्फ़ 15 दिन चलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार किस बात से भाग रही है। क्या दिल्ली के प्रदूषण के कारण सत्र छोटा किया जा रहा है? क्या कोई क़ानून या विधेयक नहीं है? क्या बहस का कोई विषय नहीं है?वे इसे बस एक औपचारिकता के तौर पर जल्द से जल्द ख़त्म करना चाहते हैं। ऐसा हमने पहली बार देखा है। उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले सत्र छोटा किया जाता है, तो क्या इसका मतलब है कि लोकसभा चुनाव आ रहे हैं?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयान पर पलटवार करते हुए एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के नेताओं को संसद सत्र चलाने में रुचि नहीं होती। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी से बार-बार अपील करते नहीं थकेंगे कि वे संसद की बहसों और चर्चाओं में भाग लें और अन्य ईमानदार सांसदों के लिए बाधाएं न खड़ी करें। संसद को चलने दें।

By editor

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