सुप्रीम कोर्ट वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 22 मई को भी सुनवाई करेगा

– केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, वक्फ एक इस्लामी अवधारणा, लेकिन इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं

नई दिल्ली, 21 मई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 22 मई को भी सुनवाई जारी रखेगा। बुधवार काे सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ एक इस्लामिक अवधारणा है, इस पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि हमने वक्फ को लेकर 2023 में कुछ कमियों को नोटिस किया था। उसे दूर करने के लिए कानून लेकर आए। यहां कुछ याचिकाकर्ता आए हैं। ये कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के सभी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। मेहता ने कहा कि ये कानून संयुक्त संसदीय कमेटी की ओर से व्यापक विचार-विमर्श कर पारित किया गया।

मेहता ने कहा कि वक्फ बाय यूजर का प्रावधान अब नये कानून में हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी को भी सरकारी भूमि पर स्थायी अधिकार नहीं मिल सकता है। सरकार ऐसी भूमि को दोबारा हासिल कर सकती है, भले ही उसे वक्फ घोषित कर दिया गया हो। यह मौलिक अधिकार नहीं है। मेहता ने कहा कि वक्फ बोर्ड सिर्फ धर्मनिरपेक्ष कामकाज करते हैं, जबकि मंदिर पूरी तरह धार्मिक संस्था होती हैं और उनका प्रबंधन मुस्लिम व्यक्ति भी संभाल सकता है।

इससे पहले 20 मई को सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि वक्फ काउंसिल्स में गैर-मुस्लिमों को सदस्य बनाना धर्मनिरपेक्षता नहीं है। उन्होंने कहा था कि हमारी आपत्ति भी यही है कि किसी भी हिंदू धर्मस्थान की बंदोबस्ती में एक भी व्यक्ति गैर हिंदू नहीं है। अगर आप अन्य धार्मिक समुदाय को विशेषाधिकार दे रहे हैं तो यहां क्यों नहीं। सिब्बल ने कहा था कि अगर आप 14 राज्यों के वक्फ बोर्ड को देखें तो सभी सदस्य मनोनीत हैं, कोई चुनाव नहीं होता। सिब्बल ने कहा कि जिस तरह शैक्षणिक संस्थानों को प्रबंधन का अधिकार है, उसी तरह धार्मिक संस्थानों को भी अपने मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार है। सिब्बल ने कहा वक्फ का निर्माण ही धर्मनिरपेक्ष कार्य नहीं है, यह मुसलमानों की संपत्ति है जिसे वे ईश्वर को समर्पित कर देते हैं।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा है कि ये संशोधन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि वक्फ कानून में संशोधन संपत्तियों के धर्मनिरपेक्ष प्रबंधन के लिए है। केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा है कि वक्फ संशोधन कानून किसी भी तरह से संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन नहीं करता है। ये संशोधन सरकार के कार्यक्षेत्र के तहत किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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