विश्व हिंदू परिषद (VHP) के विभाग संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी और रिहाई के बाद पीलीभीत में प्रशासनिक हलचल मच गई है। सरकार ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व) ऋतु पूनिया का तबादला कर उन्हें प्रतीक्षारत अधिकारी घोषित कर दिया है। यह फैसला प्रिंस गौड़ की जमानत पर रिहाई के महज एक दिन बाद आया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

विवाद की जड़: ‘डायमंड कॉलोनी’
पूरे मामले की शुरुआत कचहरी के पास विकसित हो रही डायमंड कॉलोनी से हुई थी। हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि कॉलोनी निर्माण के दौरान एक मज़ार और कई छोटे मंदिरों को हटाया गया, और एक मंदिर का रास्ता भी बंद किया जा रहा था। इसी मुद्दे पर वीएचपी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई बार नोकझोंक हुई। सोशल मीडिया पर एडीएम ऋतु पूनिया पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने मेरठ के कॉलोनाइज़रों का समर्थन किया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मामला तेजी से राजनीतिक रंग ले गया।

एडीएम ने दर्ज कराया था मुकदमा
एडीएम पूनिया ने प्रिंस गौड़ पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। उन्होंने पुलिस को तहरीर दी थी कि गौड़ ने उनके मृत माता और ससुर के नाम पर बैनामों को लेकर आपराधिक आरोप लगाए। इसी आधार पर गौड़ के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

गिरफ्तारी, रिहाई और तबादला
प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी के बाद वीएचपी पदाधिकारियों ने डीएम और एसपी से मुलाकात की, जिसके बाद मामला लखनऊ तक पहुंच गया। मंगलवार को प्रिंस गौड़ को जमानत मिल गई और बुधवार देर रात एडीएम ऋतु पूनिया का तबादला आदेश जारी कर दिया गया।

 ‘लेडी सिंघम’ की छवि पर सवाल
अपनी सख्त कार्यशैली के कारण ‘लेडी सिंघम’ के नाम से जानी जाने वाली ऋतु पूनिया का ट्रांसफर राजनीतिक हलचल के बीच हुआ है। उनके स्थान पर अब प्रसून द्विवेदी को पीलीभीत का नया एडीएम (वित्त एवं राजस्व) बनाया गया है।

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