बताते चलें कि बौद्ध अनुयाइयों और बिष हरी देवी समिति के बीच एक अरसे से विवाद चल रहा है। बौद्ध अनुयाइयों का कहना है कि भगवान बुद्ध ज्ञान को प्राप्त होने के बाद संकिसा आये थे। काफी दिन तक यहां रहकर उन्होंने अखण्ड साधना की। जिससे यह स्थान विश्वभर के बौद्ध अनुयाइयों के लिए तीर्थ बन गया है।

वहीं बिष हरी देवी समिति का कहना है कि यह मंदिर बिष हरी देवी का है, जो सनातन धर्मियों की आस्था से जुड़ा हुआ है। इसी विवाद के चलते न्यायालय ने मंदिर और स्तूप परिसर में पूजा अर्चना करने पर 1986 में रोक लगा दी। दोनों पक्षों के लिए यह स्थान निषेध कर पुलिस तैनात कर दी। तब से अब तक कार्तिक पूर्णिमा पर विश्वभर से बौद्ध अनुयाई यहां आकर बुद्ध अवतरण समारोह मनाने जरूर है, लेकिन निषिद्ध स्थान पर पूजा अर्चना करने नहीं पहुंचते। वह बैरीकेटिंग के बाहर ही पूजा अर्चना करके वापस लौट जाते हैं।

भंते नागसेन का कहना है कि पहले दोनों पक्षों में विवाद होता था। अब बौद्ध अनुयाई बैरीकेटिंग के बाहर ही पूजा अर्चना करके चले जाते हैं। आज भी उन्होंने मोमबत्ती का प्रकाश कर बैरीकेटिंग के बाहर पूजा अर्चना की।

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