सनातन विश्व देखकर भयभीत हैं सनातन द्रोही, दोषी को मिले सजा : वासुदेवानंद सरस्वती

महाकुम्भ नगर, 02 फरवरी (हि.स.)। सनातन धर्म, सनातन ग्रंथों एवं देवताओं को काल्पनिक मानने व कहने वाले महाकुम्भ मौनी अमावस्या पर देश-विदेश से प्रयाग संगम स्नान के लिए आई अपार भीड़ देखकर सनातन द्रोही अपने सर्वनाश को देखकर भयभीत हो गए हैं। श्रद्धालुओं की सनातन धर्म व मान्यताओं के प्रति आस्था व समर्पण देखकर अफवाहें फैलाकर उन्हें धोखा देने वाले मानवता के दुश्मन हैं।

उक्त विचार जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने मौनी अमावस्या पर 29 जनवरी को हुए संगम मेला में भगदड़ के सम्बंध में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प व सहयोग से आयोजित होने वाले महाकुम्भ मेला में सारी दुनिया के लोगों के मन व मस्तिष्क में केवल भारत, उत्तर प्रदेश प्रयाग और संगम तट पर संगम का दर्शन व स्नान गूंज रहा है। कुछ कुमार्गियों के षड्यंत्र से भगदड़ जैसी दुःखद घटना में श्रद्धालु सनातनियों को चोटें आई और कुछ सनातन आस्था के पथ पर चलते चलते अपने प्राणों की आहुति भी दे दिये। ईश्वर उन्हें सद्गति प्रदान करें यही मेरी प्रार्थना है। देश प्रदेश की सरकार व प्रशासनिक चुस्त प्रयासों से स्थितियों पर शीघ्र ही नियंत्रण पा लिया गया। अब भी सनातन धर्म के योद्धा अपने धर्म पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी के अनुसार, उन्होंने कहा इस दुःखद और धोखाधड़ी पूर्ण कार्य के लिए जिम्मेदार सनातन द्रोहियों को शीघ्र ही दंडित किया जाना चाहिए। वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ऐसे धर्म प्राण सनातन धर्मियों को धोखा देने व भ्रमित करने में कुछ पाखंडी लोगों की कोशिशों व प्रचार के लिए महापुण्यदायी महाकुम्भ पर्व अमावस्या का प्रयोग भी निंदनीय व दंडनीय है।

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