अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद से कुछ नीतिगत निर्णयों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बहस छेड़ दी है। अब एक ताजा फैसले के तहत अमेरिका करीब 9.7 मिलियन डॉलर (लगभग 81 करोड़ रुपये) मूल्य के गर्भनिरोधकों को नष्ट करने जा रहा है, जो कि विकासशील देशों में महिलाओं के लिए भेजे जाने थे।

क्या है पूरा मामला?
इन गर्भनिरोधकों को अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) ने महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से खरीदा था। इन उत्पादों में कॉपर IUD, रॉड इम्प्लांट्स, इंजेक्टेबल कॉन्ट्रासेप्टिव्स और गर्भनिरोधक गोलियां शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर की एक्सपायरी डेट 2028-2029 तक है।

कहां रखे गए हैं ये उत्पाद?
ये सभी गर्भनिरोधक बेल्जियम के गील शहर में स्थित एक गोदाम में संग्रहित हैं। पहले इन्हें विभिन्न अफ्रीकी और एशियाई देशों की महिलाओं तक पहुँचाया जाना था। लेकिन अब अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि ये उत्पाद नष्ट किए जाएंगे।

नष्ट करने की लागत और कारण
इन गर्भनिरोधकों को नष्ट करने में ही अमेरिका को करीब $167,000 का खर्च आएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला ट्रंप प्रशासन की नई नीति के तहत लिया गया है, जो अमेरिका की ‘घरेलू प्राथमिकताओं’ पर ज़ोर देती है। हालांकि, इससे प्रभावित होने वाले देशों और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के लिए यह निर्णय चौंकाने वाला है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ग्लोबल हेल्थ के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन जैसे Doctors Without Borders और MSI Reproductive Choices ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना की है। MSI ने तो यह प्रस्ताव भी दिया था कि वह इन उत्पादों की शिपिंग और रीपैकेजिंग का खर्च उठाने को तैयार है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया।

MSI की प्रवक्ता ग्रेस डन ने कहा, “हमें स्पष्ट कारण नहीं बताया गया कि हमारे प्रस्ताव को क्यों ठुकरा दिया गया। लेकिन यह साफ हो गया कि अमेरिकी सरकार इन गर्भनिरोधकों को भेजने में रुचि नहीं रखती।”

बेल्जियम सरकार की भूमिका
बेल्जियम के विदेश मंत्रालय ने स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा है कि वो अमेरिका के साथ मिलकर कोई वैकल्पिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है। बेल्जियम की प्रवक्ता फ्लोरिंडा बालेसी ने कहा कि उनका देश इस सप्लाई को नष्ट होने से बचाने के प्रयास कर रहा है।

 विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कई देशों में गर्भनिरोधक उत्पादों की भारी कमी हो सकती है। यह खासकर विकासशील देशों की उन महिलाओं को प्रभावित करेगा, जिनकी स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही सीमित हैं। इससे अनचाही गर्भधारण की दरें बढ़ सकती हैं और यौन स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में इज़ाफा हो सकता है।

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