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अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की ईरान की ओर से दी गई धमकियों पर यूएस ने पलटवार किया है. व्हाइट हाउस का यह बयान ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उस चेतावनी के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर और ईरानी नेताओं की हत्या की गई तो वे अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाएंगे. जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, अमेरिकी सेना ईरान के किसी भी हमले को रोकने के लिए पहले भी तैयार थी और आगे भी रहेगी. ईरानी शासन के बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन अटैक में 90 फीसदी की आई कमी इसको साफ दर्शाते हैं.’

टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी

बता दें कि युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है. अब यूएस की टेक कंपनियों को भी निशाना बनाने की तैयारी में है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने मंगलवार (31 मार्च 2026) को अमेरिका की 18 कंपनियों पर हमले की चेतावनी दी, जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट भी शामिल है. ईरान की इस धमकी ने अब कॉर्पोरेट ठिकानों को भी असुरक्षित कर दिया है.

IRGC ने अपने बयान में कहा, ईरान में हर हत्या के बदले वह इन टेक कंपनियों की संबंधित यूनिट को नष्ट कर दिया जाएगा. इसमें 18 अमेरिकी कंपनियों के नाम शामिल थे, जिन पर कथित तौर पर अधिकारियों की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया गया. आईआरजीसी ने इन टेक कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों को यह भी सलाह दी कि अगर वह अपनी जान बचाना चाहते हैं तो फौरन अपने कार्यस्थल को छोड़ दें.

Apple-Google समेत 18 कंपनियां निशाने पर

IRGC ने खाड़ी देशों में 18 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. इन कंपनियों में सिस्को, एचपी, इंटेल, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, गूगल, मेटा, आईबीएम, डेल, पालेंटिर, एनवीडिया, जेपी मॉर्गन, टेस्ला, जनरल इलेक्ट्रिक, स्पायर सॉल्यूशंस, जी42 और बोइंग शामिल हैं. ईरान के मुताबिक ये कंपनियां इजरायल और अमेरिका की सैन्य और खुफिया एजेंसियों की मदद करती हैं. ईरान ने इन कंपनियों को अपने साइबर हमलों के लिए जिम्मेदार ठहराया है.

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