अत्याधुनिक परियोजनाएं क्रियान्वित

यूपीसीडा के सीईओ मयूर महेश्वरी के नेतृत्व में जल शोधन और पुनः उपयोग की अत्याधुनिक परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इसके तहत सूरजपुर गौतमबुद्ध नगर में छह एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र को एसबीआर तकनीक में अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें 899 लाख रुपए की लागत आ रही है। इसे जून 2026 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा है। इसी तरह 3.6 एमएलडी क्षमता वाले ईपीआईपी कसना डब्लयूडब्लयूटीपी का एसबीआर तकनीक में उन्नयन जारी है। जिसकी लागत 678.59 लाख रुपये है। लोनी एसटीपी (गाज़ियाबाद) में पांच एमएलडी क्षमता वाला एमबीबीआर तकनीक पर आधारित संयंत्र 100 प्रतिशत क्षमता पर कार्यरत है। दूसरी तरफ सीईटीपी लोनी में डाइंग एवं टेक्सटाइल अपशिष्ट के लिए समर्पित संयंत्र की क्षमता छह एमलेड़ी से बढ़ाकर 16 एमएलडी की जा रही है, डीपीआर तैयार है। इसकी लागत 42 करोड़ रुपये है।

यूपीसीडा की सर्कुलर इकोनॉमी पहल: अपशिष्ट कम, पुनर्चक्रण अधिक

जीरो वेस्ट मैक्सिमम रीयूज की सोच के तहत यूपीसीडा औद्योगिक जल एवं संसाधनों के अधिकतम उपयोग की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत जल शोधन संयंत्रों से निकलने वाले जल का पुनः उपयोग किया जा रहा है। साथ ही पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और औद्योगिक इकाइयों में रिसाइकल जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में सौर ऊर्जा का उपयोग

यूपीसीडा द्वारा जल शोधन संयंत्रों और औद्योगिक क्षेत्रों को सोलर एनर्जी से सुसज्जित किया जा रहा है। संयंत्र परिसरों में रूफटॉप सोलर पैनलों की स्थापना की जा रही है, जिससे ऊर्जा लागत में कमी और कार्बन फुटप्रिंट में गिरावट आई है। इसके माध्यम से यूपीसीडा को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है।

उत्तर प्रदेश बन रहा हरित और स्मार्ट इंडस्ट्रियल स्टेट

यूपीसीडा का समग्र दृष्टिकोण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साफ जल, स्वच्छ उद्योग और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के विज़न को साकार करता है। इसके तहत सतत औद्योगिक विकास, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और प्रदूषण नियंत्रण और संसाधन संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।

By editor

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