मीरजापुर, 26 जनवरी । विंध्यधाम में 77वें गणतंत्र दिवस पर आस्था और राष्ट्रभक्ति का ऐसा अनुपम दृश्य देखने को मिला, जिसने हर श्रद्धालु के मन को भाव विभोर कर दिया। मां विंध्यवासिनी, मां अष्टभुजा और मां काली के मंदिरों में मातृशक्ति का तिरंगे के रंगों में भव्य श्रृंगार किया गया। धर्म और राष्ट्र एक सूत्र में बंधे प्रतीत हुए।
–तिरंगे में सजी माताएं, झुके श्रद्धालुओं के शीश
केसरिया, श्वेत और हरित रंगों से सजी माताओं की छवि मानो भारत माता की शक्ति, शांति और समृद्धि का संदेश दे रही थी। गर्भगृह के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और मां के चरणों में शीश स्वतः झुक गया।
–विशेष पूजा-अर्चना और आरती में गूंजा राष्ट्रप्रेम
गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा, हवन और आरती का आयोजन किया गया। शंखनाद और घंटे-घड़ियाल के बीच ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय मां विंध्यवासिनी’ के जयघोष से पूरा विंध्यधाम गूंज उठा। हर दीपक की लौ में राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कामना समाहित दिखी।
–छुट्टी का असर, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
गणतंत्र दिवस का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण भोर से ही विंध्यधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से आए भक्तों ने मां के तिरंगा श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। मंदिर परिसर, परिक्रमा मार्ग और घाटों पर आस्था का सागर लहराता नजर आया।
–सनातन परम्परा में राष्ट्र सर्वोपरि
विंध्यधाम में गणतंत्र दिवस का यह आयोजन यह संदेश दे गया कि सनातन संस्कृति में राष्ट्र और धर्म एक-दूसरे के पूरक हैं। मातृशक्ति के चरणों में श्रद्धालुओं ने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। तिरंगे के रंग में सजी मातृशक्ति और श्रद्धालुओं की अपार आस्था ने राष्ट्रभक्ति को नई ऊर्जा दी।
