उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में शिक्षक तैनाती और तबादला व्यवस्था की स्थिति लगातार चर्चा में है। प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षक बहुत हैं, तो कई स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह स्थिति एक या दो स्कूलों तक सीमित नहीं, पूरे प्रदेश में देखने को मिलती है। हर साल म्युचुअल और सामान्य तबादले किए जाते हैं और नई भर्ती में सबसे पहले शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक वाले स्कूलों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके बावजूद, कई स्कूलों में शिक्षक अधिक और कई में बिल्कुल नहीं हैं।

नवंबर में हुए तबादले और नीति
नवंबर 2025 में बेसिक स्कूलों में शिक्षक तबादले किए गए। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने आदेश जारी किया था कि सबसे पहले शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक वाले स्कूलों में तैनाती की जाएगी। लेकिन तबादलों के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। कई स्कूलों में 15-16 या उससे अधिक शिक्षक हैं, जबकि कई स्कूल शिक्षक विहीन हैं। मुख्य सचिव ने खुद इस बात पर चिंता जताई थी।

विशेषज्ञों की राय
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि एक स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए और उसका पालन होना जरूरी है, तभी स्थिति सुधर सकती है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी तैनाती करती है और कमेटी को देखना होगा कि किस परिस्थिति में कैसे तैनाती की गई।

लखनऊ और आसपास के स्कूलों की स्थिति
– बाराबंकी के ठकरामऊ अपर प्राइमरी स्कूल में 13 शिक्षक
– कंपोजिट स्कूल उमरा में 16 शिक्षक
– लखनऊ के कंपोजिट स्कूल गढ़ी चुनौटी में 14 शिक्षक
– जूनियर हाईस्कूल कन्या बिजनौर में 14 शिक्षक
– अपर प्राइमरी स्कूल कल्ली पश्चिम में 12 शिक्षक
– कंपोजिट स्कूल सदरौना में 15 शिक्षक
-वहीं, कुछ स्कूलों में केवल एक शिक्षक है:
– बाराबंकी के कंपोजिट स्कूल आसवा में 1 शिक्षा मित्र
– लखनऊ के प्राथमिक विद्यालय विधिश्यामा में 1 शिक्षक

कुछ स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है:
– प्रतापगढ़ के अपर प्राइमरी स्कूल मिया कुंबी
– लखनऊ के जूनियर हाईस्कूल गोडवा बरौकी

कैसे आई ये स्थिति?
शिक्षक अधिक वाले स्कूल शहर या मुख्य सड़क के पास हैं, जबकि दूरदराज इलाकों में शिक्षक की कमी है। पहले ऑफलाइन तबादले होते थे, जिसमें शिक्षक मिलकर अपने मनचाहे स्कूल में जुगाड़ कर लेते थे। अब ऑनलाइन तबादले में शिक्षक अपनी प्राथमिकता से आवेदन करते हैं। लेकिन कुछ शिक्षक ने आवेदन ही नहीं किया। आवेदन करने वालों में जूनियर और सीनियर का विवाद खड़ा हो गया। ऑनलाइन तबादलों में भी छात्र-शिक्षक अनुपात की अनदेखी की गई। कुछ मामलों में इंटीरियर के शिक्षक को सस्पेंड करके शहर के अच्छे स्कूल में बहाल कर दिया गया। इस वजह से कई स्कूलों में अत्यधिक शिक्षक और कई स्कूल शिक्षक विहीन हैं।

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