देहरादून, 18 फरवरी । उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता एक गीगावाट (1000 मेगावाट) से अधिक हाे गई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल स्थापित सौर क्षमता लगभग 1027.87 मेगावाट हो चुकी है, जो स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में उत्तराखंड की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बुधवार को सूचना विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति उनकी नीति का परिणाम है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के विजन से प्रेरित होकर उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। राज्य सरकार और केंद्र की योजनाओं के समन्वय से हजारों युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में सहायक है,बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने,ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती है।
राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता में ग्राउंड माउंटेड 397 मेगावाट,रूफटॉप सोलर पावर (पीएम सूर्यघर) 241 मेगावाट,मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 मेगावाट,कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर 51 मेगावाट, कैनाल टॉप,कैनाल बैंक 37 मेगावाट और सरकारी भवनों पर 26 मेगावाट शामिल हैं। वर्तमान में विभिन्न योजनाओं के तहत और संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि में उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (यूरेडा) का विशेष योगदान रहा है। सरकार ने भविष्य में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाने,दूरस्थ क्षेत्रों में सौर समाधान प्रोत्साहित करने और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
