उमा का कहना है कि उसकी शादी पुलिस दबाव में कराई गई। उसने अपने पति शिव शंकर पर किसी दूसरी महिला से अवैध सम्बंध होने का आरोप लगाया। इसी को लेकर दोनों में अक्सर झगड़े होते थे। उमा ने बताया कि जब उसका रिश्तेदार भाई उसे छुड़ाने आया तो पुलिस ने उसे भी फंसा दिया और जबरन मंदिर में विवाह करा दिया। उसने कहा कि जिस व्यक्ति से उसकी शादी कराई गई है, वह वास्तव में उसका रिश्तेदार भाई है। विशाल प्रजापति ने भी पुलिस पर आरोप लगाया कि उसे घर से जबरन उठाकर थाने लाया गया और मारपीट कर शादी कराई गई। उसने कहा कि प्रधान और पुलिस ने पैसे लेकर षड्यंत्र रचा। साथ ही उसकी गाड़ी को चोरी का बताकर थाने में खड़ा कर दिया गया। विशाल की मां संगीता ने कहा कि उसके बेटे का उमा से कोई सम्बंध नहीं था, पुलिस ने जबरदस्ती विवाह कराया है।

कमरौली थानाध्यक्ष मुकेश पटेल ने रविवार की शाम को आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मामला 4 सितम्बर को उनके पास आया था। पति-पत्नी दोनों का शांति भंग की धारा में चालान किया गया। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से उमा और शिवशंकर ने स्टाम्प पेपर पर विवाह विच्छेद का हलफनामा जमा किया, जिसके बाद उमा और विशाल ने 13 सितम्बर को मंदिर में विवाह अनुबंध पत्र प्रस्तुत किया। थानाध्यक्ष ने कहा कि यह पूरा विवाह उनकी जानकारी में आपसी सहमति से हुआ है।

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