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विकास खण्ड सिटी में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि कैसे योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। दिव्यांग लाभार्थी देवी चौहान ने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद वे सामुदायिक शौचालय में केयर टेकर का कार्य कर रही हैं और प्रतिमाह 6 हजार रुपये की आय प्राप्त कर रही हैं। वहीं अनीता देवी ने समूह से ऋण लेकर चूरा व आइसक्रीम मशीन लगाकर अपना रोजगार शुरू किया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

टांड निवासी रंजना मौर्या ने बताया कि वर्ष 2019 से समूह से जुड़ने के बाद उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है और सामाजिक दायरों में पहचान बनी है। नीलम चैरसिया ने बैंक सखी के रूप में ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के अनुभव साझा किए।

विकास खण्ड कोन में संकुल स्तरीय संघ की लेखाकार साधना ने कहा कि समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं को नई पहचान और सम्मान मिला है। वहीं रेखा जायसवाल ने आंगनबाड़ी से जुड़कर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की जानकारी दी।

सर्वे टीम ने निष्कर्ष निकाला कि सरकारी योजनाएं वास्तव में आधी आबादी को स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ा रही हैं। इस दौरान खंड विकास अधिकारी सिटी मुनीश कुमार व ब्लॉक मिशन मैनेजर कोन विनोद प्रजापति भी मौजूद रहे।

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