वेदमंत्रों की अन्त्याक्षरी में जगद्गुरुकुलम् के बटुकों ने उत्साह से की भागीदारी

—शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बढ़ाया उत्साह,पुरस्कृत किया

वाराणसी, 13 मई (हि.स.)। केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में मंगलवार को जगद्गुरुकुलम् के बटुकों (विद्यार्थियों) ने वेदमंत्रों की अन्त्याक्षरी में धारा प्रवाह मंत्र बोलकर उपस्थित संतों और विशिष्ट जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्‌गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के सानिध्य में छात्रों ने आयोजित वेद मंत्रों का अन्त्याक्षरी प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आदर्श पाठक, द्वितीय उपेंद्र शुक्ल एवं तृतीय विश्वजीत उपाध्याय रहे।

इसमें बटुक आनंद पांडेय, अनमोल चौबे, कुंदन पांडेय, ऋतिक तिवारी, अंबुज उपाध्याय, अनन्त बाबू झा, प्रयागराज उपाध्याय, वेदांत चतुर्वेदी, विश्वजीत उपाध्याय, उपेंद्र शुक्ला, आदर्श पाठक, राजेश ओझा, सत्यम दुबे, कौशल ओझा, नमन तिवारी, सौरभ पांडेय, आर्यन उपाध्याय, रंजन तिवारी, मयंक मिश्र आदि ने भागीदारी की। डॉ. ऋषिता ने पुरस्कार देकर सभी छात्रों को सम्मानित किया। प्रतिभागी छात्रों को साध्वी पूर्णम्बा, ब्रम्ह्चारी परमात्मानंद, परमेश्वरदत्त शुक्ल, प्रधानाचार्य एस. एस. पांडेय, उप प्रधानाचार्य आर्यन सुमन पांडेय, यतीन्द्रनाथ चतुर्वेदी, अभय शंकर तिवारी, सावित्री पांडेय ने भी उत्साहित किया।

मठ के संजय पांडेय ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेवरानंद सरस्वती सनातन धर्म के पारंपरिक मूल्यों के प्रतिस्थापन के लिए कटिबद्ध हैं। इसलिए शंकराचार्य महाराज देश के विभिन्न राज्यों के अनेकों शहरों व गावों में जगदगुरुकुलम की स्थापना कर रहे हैं। इसके माध्यम से बच्चों को वैदिक व पारंपरिक शिक्षा प्रदान कर उनके अंदर स्वधर्म के प्रति गौरव के भाव जागृत किए जाएंगे। जगदगुरुकुलम से शिक्षित बच्चे ही भविष्य में सनातनधर्म के आदर्शों का प्रचार प्रसार करेंगे।

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