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नई दिल्ली, 26 फरवरी । उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मणिपुर हिंसा मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राज्य विशेष जांच दल (एसआईटी) को पीड़ितों और उनके परिवारों को चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने सीबीआई जांच की निगरानी कर रहे महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी दत्तात्रेय पदसालगिकर की ओर से दाखिल ताजा स्टेटस रिपोर्ट पर गौर करने के बाद ये आदेश दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई ने मणिपुर हिंसा के 20 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है और छह मामलों की जांच अभी जारी है।

कोर्ट ने 13 फरवरी को सीबीआई से जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया था कि अब मणिपुर या गुवाहाटी उच्च न्यायालय इन मामलों की निगरानी करें। कोर्ट ने कहा था कि अब मणिपुर उच्च न्यायालय में नये चीफ जस्टिस आ गए हैं, इसलिए वे स्थानीय हालात को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वो पीड़ितों के पुनर्वास के लिए बनी जस्टिस गीता मित्तल कमेटी की सिफारिशें जल्द लागू करे।

उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में बनी कमेटी पीड़ितों के पुनर्वास और उनके कल्याण के लिए बनाई थी। इस कमेटी में जस्टिस गीता मित्तल के अलावा जस्टिस शालिनी जोशी और जस्टिस आशा मेनन को शामिल किया था। कोर्ट ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी दत्तात्रेय पदसालगिकर को नियुक्त किया था।

मणिपुर में मई, 2023 में शुरु हुई हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। इस हिंसा में हजारों लोग बेघर हुए और कई घायल हो गए। यह हिंसा तब भड़की जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था।

By editor

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