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लखनऊ, 20 फरवरी । लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में शुक्रवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि सुशासन, जनकल्याण, राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक स्वाभिमान के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए एक सशक्त और जनोन्मुख शासन की स्थापना की, जो आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों में शिवाजी महाराज ने जिस दूरदर्शिता, रणनीति और जनविश्वास के बल पर ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना की, वह आत्मनिर्भरता और सशक्त नेतृत्व का अनुपम उदाहरण है।

पंकज चौधरी ने कहा कि शिवाजी की सेना में सभी धर्मों के लोगों का सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। उन्होंने महिला, सुरक्षा, किसानों के कल्याण और स्वदेशी को बढ़ावा दिया। उन्होंने मजबूत किलेबंदी और भारत की पहली नौसेना का निर्माण किया। जिसके लिए उन्हें भारतीय नौसेना का जनक भी माना जाता है। शिवाजी महाराज को आज भी हम न्याय की भावना, वीरता और उनकी रणनीतिक सूझबूझ की लिए याद करते हैं।

श्री चौधरी ने कहा कि शिवाजी महाराज के साथ यहां पर उनके कुछ बहुत भरोसेमंद लेफ्टिनेंट्स का भी जिक्र करना चाहूंगा जैसे कि तानाजी मालुसारे, बाजी प्रभु देशपांडे और नेताजी पालकर, जिनकी अटूट निष्ठा और बहादुरी के उनके सैन्य अभियानों और उनके राज्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्री चौधरी ने कहा कि शिवाजी महाराज का महिलाओं के सम्मान हेतु स्पष्ट आदेश था। यह बात आज भी इतिहास में दर्ज है कि शिवाजी महाराज ने शत्रुपक्ष की महिला को भी सम्मानपूर्वक वापस उसके घर भेजा था। उनका शासनकाल महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा के लिए एक आदर्श मिसाल है। शिवाजी महाराज के समावेशी शासन के दृष्टिकोण में महिलाओं, युवाओं, किसानों और गरीबों का सशक्तिकरण शामिल था।

समारोह के अध्यक्ष के रूप में संबोधित करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल इतिहास के महानायक नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना, स्वाभिमान और जननेतृत्व के जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने सीमित संसाधनों में भी आत्मविश्वास, संगठन और दूरदर्शिता के बल पर एक सशक्त व्यवस्था स्थापित की। प्रो. सैनी ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि युवाओं में नेतृत्व क्षमता, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध विकसित करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर अनुशासित, जागरूक और समाजोपयोगी नागरिक बनें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। समारोह के मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एस. वी. नामसे ने अपने उद्बोधन में लखनऊ विश्वविद्यालय में छत्रपति शिवाजी के नाम पर शोध पीठ स्थापित करने का अनुरोध किया जिसका समर्थन करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कुलपति को आश्वस्त किया और कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर शोधपीठ की स्थापना में हर संभव सहयोग करेंगे।

यूपी योगा एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता नीरज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस, संगठन शक्ति और जनकल्याण के माध्यम से आदर्श शासन की स्थापना की। शिवाजी महाराज का जीवन हमें राष्ट्र प्रथम की भावना, स्वाभिमान और समाज की रक्षा के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, छात्र-छात्राएं, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 17 विशिष्ट विभूतियों को “छत्रपति शिवाजी महाराज कर्मयोगी सम्मान” से सम्मानित किया गया, जिनमें चार पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित व्यक्तित्व भी शामिल रहे। समारोह के संयोजक डॉ. संजय शुक्ल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी।

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