प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में बोलते हुए आतंकवाद को दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया।

शहबाज शरीफ के सामने ही कहा कि पहलगाम में दुनिया ने आतंक का घिनौना रूप देखा। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद का दंश झेल रहा है और आतंकवाद पर दोहरा रवैया नहीं चलेगा।

पीएम मोदी ने यहां कहा, “भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है… हाल ही में, हमने पहलगाम में आतंकवाद का घिनौना रूप देखा। इस दुख की घड़ी में जो मित्र देश हमारे साथ खड़े रहे मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं।”

चीन के तियानजिन शहर रविवार से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट चल रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी सात साल बाद चीन के दौरे पर हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेताओं का स्वागत किया। 25वें शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत रविवार रात शी चिनफिंग द्वारा आयोजित एक भव्य भोज के साथ हुई। इसमें प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेता भी शामिल हुए।

इस वर्ष का शिखर सम्मेलन एससीओ समूह का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन बताया गया है, क्योंकि इस वर्ष एससीओ के अध्यक्ष चीन ने ‘एससीओ प्लस’ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस सहित 20 विदेशी नेताओं और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है।

सोमवार को विभिन्न नेता बैठक को संबोधित करेंगे तथा संगठन के लिए अपने भविष्य के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे।

शी चिनफिंग से मोदी की मुलाकात और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विभिन्न देशों पर नए शुल्क लगाए जाने की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण पर उत्सुकता से नजर रखी जाएगी। माना जा रहा है कि इस बैठक से संबंधों के लिए नया खाका तैयार होगा।

स्वागत भोज पर अपने संबोधन में शी ने कहा कि एससीओ पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा करने तथा बढ़ती अनिश्चितताओं और तेज परिवर्तन की दुनिया में विभिन्न देशों के विकास को बढ़ावा देने की बड़ी जिम्मेदारी है।

शी ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्षों के सम्मिलित प्रयासों से शिखर सम्मेलन पूर्णतः सफल होगा तथा एससीओ निश्चित रूप से और भी बड़ी भूमिका निभाएगा, सदस्य देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में अधिक योगदान देगा, ‘ग्लोबल साउथ’ की ताकत को एकजुट करेगा तथा मानव सभ्यता की और अधिक प्रगति को बढ़ावा देगा।

‘ग्लोबल साउथ’ का संदर्भ आर्थिक रूप से कमजोर देशों के समूह के लिए दिया जाता है।

एससीओ की स्थापना जून 2001 में शंघाई में हुई थी और इसमें छह संस्थापक सदस्य थे। अब 26 देश इसका हिस्सा हैं, जिनमें 10 सदस्य, दो पर्यवेक्षक और 14 वार्ता साझेदार शामिल हैं, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका में फैले हुए हैं।

प्रमुख उभरते बाजारों और चीन, रूस तथा भारत जैसे विकासशील देशों के सदस्यों के साथ, एससीओ विश्व की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करता है।

 

रविवार को तियानजिन में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई।

जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को SCO समिट से पहले फोटो सेशन में हिस्सा लिया। इसके बाद पुतिन और जिनपिंग से मुलाकात की। तीनों नेता एक दूसरे के हाथ पकड़े नजर आए। इस दौरान मोदी ने पुतिन को गले भी लगाया। थोड़ी देर में मोदी SCO की बैठक को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे पुतिन के साथ द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे।
 

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