श्रीमद्भगवदगीता वैदिक न्यास एवं श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में गीता संगोष्ठी का आयोजन ओंकारेश्वर विद्या मन्दिर के प्रांगण में आयोजित हुआ।
गीता संगोष्ठी में ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि गीता के द्वारा ही समाज, राष्ट्र एवं विश्व में शान्ति का प्रतिपादन किया जा सकता है। उन्होंने गीता के तीसरे अध्याय के 21वें श्लोक की व्याख्या करते हुये कहा कि समाज में श्रेष्ठजनों के आचरणों का अनुसरण ही समाज करता है और श्रेष्ठता, सद्भाव एवं सुकर्मों में ही आती है। उनके अच्छे कर्म एवं आचरण ही अनुकरणीय होता है न कि बड़े-बड़े उपदेश।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कैप्टन जगतवीर सिंह दोण (पूर्व महापौर) ने की तथा मुख्य अतिथि पं. नरेन्द्र शर्मा ने गऊ, गंगा, गीता, गायत्री, गोविन्द की महत्ता को बताते हुए इनसे स्वामी ज्ञानानंद को जोड़ा। मणी प्रसाद मिश्रा (पूर्व गृह सचिव उत्तर प्रदेश) जो कि गीता के प्रदेश संयोजक है। उन्होंने 23 नवम्बर 2025 को लखनऊ के रमाबाई मैदान में एक लाख से अधिक लोगों के सामूहिक गीता पाठ व उसमें होने वाले अन्य कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में रमेश चिन्तक ने भी गीता एवं अन्य वैदिक साहित्य की महत्ता के बारे में बताया।
अन्त में कार्यक्रम के संयोजक डा उमेश पालीवाल ने स्वामी को कानपुर व आस-पास के जिलों में व्यापक रूप ले रहे गीता आन्दोलन को शुरूआत से ही मार्गदर्शन देने का धन्यवाद दिया। साथ ही आगे भी सभी को प्रेरित करने का आग्रह किया। इसी के साथ उन्होने 23 नवम्बर के लखनऊ के कार्यक्रम में सभी जागरूक व प्रबुद्वजनों को लखनऊ चलने का आवहान किया। 23 नवम्बर के कार्यक्रम में सर संघसचांलक मोहन भागवत ने आने की अनुमति दे दी है, साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी आने व सहयोग का आश्वासन दिया है।

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