बुद्धिस्ट पर्सनल लॉ एक्शन कमेटी ने दायर याचिका में कहा था कि बौद्ध समुदाय हिन्दू मैरिज एक्ट, हिन्दू उत्तराधिकार कानून, हिन्दू अल्पसंख्यक और अभिभावकत्व कानून और हिन्दू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम से ही संचालित होते हैं। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 में हिन्दू की परिभाषा के तहत बौद्ध, जैन और सिख भी आते हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि बौद्ध एक अलग समुदाय है और इसे लेकर कई बार प्रतिवेदन दिया जा चुका है। तब कोर्ट ने कहा कि देश में लॉ कमीशन ही एक ऐसा विशेषज्ञ निकाय है, जिसका मुखिया अक्सर उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज या उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश होते हैं। अगर याचिकाकर्ता लॉ कमीशन के पास जाएंगे, तो वे इसका स्वागत करेंगे और वो किसी भी संशोधन के लिए अनुशंसा कर सकेंगे। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दिसंबर, 2024 में 21वें लॉ कमीशन ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर विचार करते समय इस मसले पर भी विचार किया था।
