नीरज प्रजापति
पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं पीड़ित परिवार और ग्रामीण, निष्पक्ष जांच के साथ सीबीआई जांच की मांग भी उठी।
मुजफ्फरनगर। पुरकाजी क्षेत्र के गांव हरेटी निवासी रोहन राठी हत्याकांड को लेकर जनपद में आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। हत्याकांड के खुलासे के बावजूद पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के मन में उठ रहे सवाल अब आंदोलन का रूप ले चुके हैं। आज भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर मुजफ्फरनगर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जा रहा है जिसमे जनपद मुजफ्फरनगर सहित शामली मेरठ और बिजनौर से किसानों के जुटने का दावा किया जा रहा है। आंदोलन के केंद्र में एक ही मांग है कि रोहन राठी की हत्या की निष्पक्ष जांच हो इस घटना से जुड़े सभी सवालों के जवाब सामने आएं और परिवार को न्याय मिलने का भरोसा मिले।
खेत में मिला था रोहन का शव, घटना से दहल उठा था गांव

गांव हरेटी के ग्राम प्रधान विवेक राठी के 19 वर्षीय पुत्र रोहन राठी का शव 24 सितंबर को सलेमपुर मार्ग के पास जंगल में मिला था। रोहन के इस तरह मृत पाए जाने की खबर से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद मामला हत्या का सामने आया। घटना के बाद ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। शुरुआती दौर में ही यह मामला स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा, फिर भी उठते रहे सवाल

पुलिस ने 25 सितंबर को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा करने का दावा किया था। हालांकि, मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस की बताई कहानी पर सवाल उठाए और जांच को लेकर असंतोष जताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसका नेतृत्व एसपी सिटी को सौंपा गया। इसके बावजूद परिवार की शंकाएं पूरी तरह दूर नहीं हो सकीं। हाल ही में लखनऊ से पहुंची मेडिकोलीगल टीम ने एसआईटी और साइबर टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा घटनाक्रम की कड़ियां समझने के लिए सीन रिक्रिएशन भी किया।
अब एसएसपी कार्यालय पर आंदोलन, सीबीआई जांच की मांग

हत्याकांड को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और ग्रामीणों का कहना है कि मामले की जांच ऐसी होनी चाहिए, जिससे पीड़ित परिवार के मन में मौजूद सवालों का समाधान हो सके। ग्रामीणों की ओर से सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई है। इससे पहले पंचायतों और बैठकों के माध्यम से पुलिस प्रशासन तक अपनी नाराजगी पहुंचाई गई थी। अब 21 अक्टूबर को एसएसपी कार्यालय पर जुटकर धरना देने का निर्णय लिया गया है। संगठन और ग्रामीणों की मांग है कि जांच में पारदर्शिता बरती जाए और यदि किसी महत्वपूर्ण पहलू की जांच बाकी है, तो उसे भी गंभीरता से शामिल किया जाए।
भरोसे की बहाली पुलिस प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
रोहन राठी हत्याकांड अब केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच पर भरोसे और न्याय की अपेक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि उपलब्ध साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और उठाई गई आपत्तियों के आधार पर मामले के प्रत्येक पहलू को स्पष्ट करे। धरना कितने दिन चलेगा और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे, यह आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल पीड़ित परिवार और आंदोलन से जुड़े लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। उनकी अपेक्षा है कि रोहन राठी हत्याकांड की जांच पर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब मिले और न्याय की प्रक्रिया पर विश्वास मजबूत हो।
