महाकुम्भ : करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ देखते हुए जूना अखाडे के संतों ने दोपहर में किया अमृत स्नान

जूना अखाडे के संतों ने महाकुंभ में माघ पूर्णिमा के मुख्य स्नान पर मिसाल कायम की : श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज

महाकुम्भ नगर, 12 फ़रवरी (हि.स.)। जूना अखाड़े के संतों ने महाकुम्भ में माघ पूर्णिमा के मुख्य स्नान पर्व पर मिसाल कायम की। अमृत स्नान के लिए उमड़े विश्व भर के भक्तों की करोड़ों की भीड देखते हुए उन्होंने प्रातः की बजाय दोपहर में स्नान किया। माघ पूर्णिमा पर बुधवार को भक्तों का जन सैलाब उमड़ा। सायंकाल तक दो करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। संगम व उसके आसपास के क्षेत्रों में तो पैर तक रखने की जगह नहीं थी। इसी के चलते जूना अखाड़े के संतों ने प्रात: स्नान नहीं किया और विश्व भर से आए भक्तों की सुविधा के लिए उन्होंने दोपहर को 2 बजे संगम में स्नान किया।

गंगार्चाय जगतगुरू शंकराचार्य महेंद्रानंद सरस्वती महाराज व जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर व जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज, रमता पंच के निंरजन भारती महाराज, मेला प्रभारी श्रीमहंत मोहन भारती महाराज, महामंडलेश्वर रवि गिरि महाराज श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर व जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरी महाराज, सचिव विद्यानंद गिरि महाराज, सचिव ओम भारती महाराज, निर्वाण मंत्री शैलजा गिरि महाराज, महाकाल गिरि महाराज समेत हजारों संतों व भक्तों ने दोपहर 2 बजे संगम में माघ पूर्णिमा का मुख्य स्नान किया।

श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि प्रयागराज महाकुम्भ अब तका सबसे ऐतिहासिक, दिव्य व भव्य महाकुम्भ बन गया है।विश्व भर के भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है और जूना अखाड़ा ने खुद से पहले भक्तों को प्राथमिकता देकर मिसाल कायम की है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज व जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के नेतृत्व में बुधवार को यह निर्णय लिया गया कि पहले भक्त स्नान करेंगे, उसके बाद जूना अखाड़े के संत स्नान करेंगे। इसी के चलते माघ पूर्णिमा का स्नान प्रातः की बजाय दोपहर 2 बजे किया गया। महाकुम्भ में प्रवेश यात्रा के समय भी जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, थानापति समेत सभी पदाधिकारी व सभी संत रथों व घोड़ाें आदि के स्थान पर भक्तों के साथ ही संगम तक पहुंचे थे।

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